7 December 2025

गुरुदेव की अपार कृपा सबसे बड़ी अमूल्य ज्ञान निधि के रूप में प्राप्त होती है श्री महंत दुर्गादास महाराज

विज्ञापन

सम्पादक परमोद कुमार

हरिद्वार (मनोज ठाकुर) भूपतवाला त्यागी गली स्थित श्री माता वैष्णो शक्ति भवन में श्री जगत जननी मां वैष्णो देवी की असीम अनुकंपा से मां भागीरथी की पावन नगरी हरिद्वार में प्रातः स्मरणीय परम तपस्वी ज्ञान मूर्ति अनंत विभूषित श्री महंत दुर्गादास जी महाराज के पावन पतित सानिध्य में परम पूज्य गुरु भगवान साकेतवासी श्री श्री 1008 महंत राम रतन दास जी महाराज फौजी बाबा की 22वीं पावन पुण्यतिथि विशाल संत समागम में 17 नवंबर 2025 को संत महापुरुषों की गरिमा मय उपस्थित के बीच बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाई गई इस अवसर पर अपने श्री मुख से ज्ञान की वर्षा करते हुए अनंत विभूषित श्री महंत परम पूज्य दुर्गादास महाराज ने कहागुरुजनों के ज्ञान की निधि तथा सतगुरु देव की अपार कृपामानव जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य होता है — उसे एक सच्चा गुरु मिल जाना। क्योंकि माता-पिता हमें जन्म देते हैं, पर गुरु हमें जीने का सही अर्थ सिखाते हैं। गुरुजनों के ज्ञान की निधि इतनी विशाल होती है कि उसमें डूबकर कोई भी अपने जीवन का अंधकार मिटा सकता है।गुरु वह ज्योति हैं जो अनभिज्ञता के अंधेरे को चीरकर हमें सत्य का रास्ता दिखाती है। उनका ज्ञान केवल पुस्तकें ही नहीं, बल्कि अनुभव, सद्मार्ग और कर्म की महत्ता समझाता है।गुरु का दिया हुआ एक वाक्य कई बार जीवन की दिशा बदल देता है — क्योंकि उसमें उनकी तपस्या, उनका अनुभव और उनका प्रेम भरा होता है।
सतगुरु देव की अपार कृपा तो ऐसी है जैसे सूखी धरती पर पहली बारिश।जब सतगुरु का स्नेह जीवन में उतरता है, तब मन में स्थिरता आती है, विचारों में स्पष्टता आती है और हृदय में करुणा जागती है। उनकी कृपा मनुष्य को साधारण से असाधारण बना देती है।कहते हैं श्री महंत परम पूज्य प्रातः स्मरणीय दुर्गादास जी महाराज ने कहा
“जहाँ सतगुरु की छाँव हो, वहाँ भय का नाम भी नहीं रहता।”
सतगुरु की दया का प्रभाव इतना गहरा होता है कि व्यक्ति अपने भीतर के संशय, क्रोध, दुख, असुरक्षा—सबको पीछे छोड़ देता है।गुरु की उपस्थिति से जीवन में अनुशासन आता है, संस्कार आते हैं और आत्मबोध की राह खुलती है।
कहना गलत नहीं होगा कि गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि जीवन-परे जीवन का प्रकाश हैं।आज के युग में, जहाँ मनुष्य तनाव, भ्रम और असंतोष से घिरा है, वहाँ गुरु का मार्गदर्शन अमृत के समान है।
उनके शब्द शांति देते हैं,
उनका ज्ञान दिशादेता है,
और उनकी कृपा गति देती है।अंत में यही कहा जा सकता है कि—गुरु ज्ञान की निधि हैं और सतगुरु देव उनकी अपार कृपा का साक्षात रूप|जिसे सच्चे गुरु की शरण मिल जाती है, समझ लो उसे संसार की सबसे अनमोल संपत्ति मिल गई। इस अवसर पर बोलते हुए गुरु राम सेवक उछाली आश्रम के श्री महंत प्रातः स्मरणीय 1008श्री विष्णु दास जी महाराज ने कहा इस पृथ्वी लोक में गुरुदेव एक ऐसे पथ दर्शक हैं जो हमारे सुने पड़े मन मस्तिष्क में ज्ञान की अखंड ज्योत जला देते हैं ज्ञान बिना मनुष्य जीवन अंधकार मय है और ज्ञान हमें गुरु चरणों से प्राप्त हो सकता है इसीलिए गुरुदेव की आराधना ईश्वर से पहले होती है गुरु मिलते हैं ईश्वर से गुरु ही देते ज्ञान भवसागर की नैया के गुरु ही तारण हार गुरु हमारे जीवन की आधारशिला है जो अपने ज्ञान के माध्यम से हमारे ज्ञान चक्षु खोल देते हैं और हमारे अंधकार भरे मन मस्तिष्क में ज्ञान का उदय कर देते हैं इस अवसर पर बोलते हुए महंत प्रहलाद दास महाराज ने कहा जन्मो जन्म के पुण्यो के उदय हो जाने से प्राप्त होती है गुरु ज्ञान का वह सागर है जिनके ज्ञान रूपी सरोवर में स्नान करने के बाद हमारा यह मानव जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता है इस अवसर पर महंत गुरमल सिंह महाराज महंत विष्णु दास महाराज महंत हरिदास महाराज महंत प्रमोद दास महाराज महंत नागा बाबा गजेंद्र गिरी महाराज पं शिवदास महंत वीरेंद्र स्वरूप महाराज महंत कमलेश्वरानंद महाराज सहित हजारों की संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे

 

विज्ञापन
Copyright © All rights reserved. | Sakshar Haridwar Powered by www.WizInfotech.com.