इन्सान का मन किसी मंदिर से कम नहीं होता श्री श्री आनंदमयी साधना मां

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार 26 अप्रैल 2025 (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द) दक्ष रोड कनखल स्थित श्री आनंदमयी कविता मां श्री माधव आश्रम में भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए श्री श्री आनंदमयी साधना मां ने कहा जिसके मन में भक्ति का वास हो गया हो उसके हृदय में स्वयं भगवान विराजमान हो जाते हैं वह जो देखना चाहता है सिर्फ उसे वही दिखाई देते हैं क्योंकि उसके हृदय में जब भगवान विराजमान है तो उसे मन की आंखों से हर रूप में हर स्वरूप में हर जीव में ईश्वर के दर्शन होंगे क्योंकि वह अपने मन से अपने हृदय से विकारों को मिटाकर उसमें भगवान का वास कर चुका है इसीलिये कहते हैं जैसा पिया पानी वैसी हो गई वाणी और जैसा खाया अन्न वैसा हो गया मन शुद्ध आहार और शुद्ध विचारों का होना आवश्यक है विचारों में लचीलापन मन को भटका सकता है