भक्ति भगवान एवम भक्तों के बीच सेतु का कार्य करती है महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार भूपतवाला स्थित प्राचीन श्री राम मंदिर आश्रम में श्री ठाकुर जी भगवान का पाटोत्सव तथा आश्रम का वार्षिक अधिवेशन एक विशाल संत समागम के रूप में संत महापुरुषों की गरिमा मय उपस्थित के बीच आश्रम के श्री महंत महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामदास महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ इस अवसर पर अपने श्री मुख से ज्ञान की वर्षा करते हुए महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री श्याम दास महाराज ने कहा भक्ति भगवान एवम भक्त के बीच सेतु का कार्य करती है भक्ति मनुष्य के मन का ईश्वर के प्रति एक भाव है जैसे आपने ईश्वर का नाम पुकारा उनकी महिमा का वर्णन सुना तथा ईश्वर की महिमा के गुणगान से जो आपके मन में भाव उत्पन्न हुआ वही भवसागर की और जाने वाला मार्ग है और सतगुरु देव भवसागर पार करने वाली नैया के नाभिक है तारण हार है राम नाम तीन आखर का महज एक शब्द लगता है किंतु राम नाम जीवन का आधार है और इन तीन अक्षरों के शब्द में संपूर्ण त्रिकाल समाया है तीनों लोक इस राम नाम की आभा से प्रकाश मान हो रहे हैं अगर जीवन में त्याग और समर्पण की शिक्षा लेनी है तो भगवान श्री राम के जीवन से लो उन्होंने पितृ आज्ञा माता आज्ञा और गुरु आज्ञा के लियें और उनका मन आहत न हो इसलिये राजपाठ और वैभव और सभी सुखों का त्याग कर वनवास जाना स्वीकार किया और अगर समर्पण भाव देखना है भाई के प्रति प्रेम देखना है तो इसकी शिक्षा भरत जी के जीवन से ले लक्ष्मण जी के जीवन से ले उन्होंने अपने भाई भगवान श्री राम की भावना आहत न हो इसलिये उनकी चरण पादुका शीश पर धारण कर उनकी आज्ञा से उन्हीं की तरह नगर के समीप वन में रहकर राजभोग त्याग कर एक संत की तरह 14 वर्ष तक जीवन व्यक्तित किया और लक्ष्मण जी ने पूरे 14 वर्ष तक बिना सोये राम सिया की सेवा की और अगर भक्ति देखनी है और शिक्षा लेनी है तो संकट मोचन कृपा निधान वीर बजरंगी बली के जीवन से भक्त की शिक्षा लें जिन्होंने राम नाम की भक्ति में लीन होकर सौकोष का समुद्र तक लाघ दिया और चरणों में बैठकर राम के हो गये शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि अगर भगवान राम को मिलना है भगवान राम को प्राप्त करना है उनके दर्शन करने हैं तो पहले हनुमान जी को मनाना होगा राम नाम ऊपरी मन से भजने से कुछ नहीं होता राम नाम का रस अपने जीवन में घोट कर पीना पड़ता है भगवान राम को हृदय में बसाना पड़ता है और भगवान राम का हो जाना पड़ता है राम नाम की भक्ति में इतने लीन हो जाओ की भगवान राम का तेज और भगवान राम की आभा आपके मन मस्तिष्क पर दूसरों को प्रदर्शित होने लगे और जीवन में अगर सबर की शिक्षा लेनी है तो माता शबरी के जीवन से लो उन्होंने अपने गुरु की आज्ञा से वन में रहकर सदियों तक भगवान राम के आने की प्रतीक्षा की और सदियों तक राम नाम का जाप किया तब जाकर एक दिन उनकी कुटिया में भगवान राम पथारे इस अवसर पर बोलते हुए आश्रम के श्री महंत महामंडलेश्वर परम वंदनीय अनंत विभूषित त्याग मूर्ति श्री रामदास महाराज ने कहा गुरु की भक्ति एवम गुरु की सेवा मनुष्य के जन्मो जन्म के पुण्यों के उदय होने से प्राप्त होती है हमारे सतगुरु जगत कल्याण की भावना लेकर सदैव तपस्या में लीन रहते हैं सांसारिक जीवन के संपूर्ण सुख सुविधा और मोह त्याग कर दूसरों के कल्याण की भावना लेकर ईश्वर भक्ति में लीन रहते है जो भक्त सच्चे मन से गुरु के बताये मार्ग पर चलते हैं एवम गुरु की भक्ति करते भगवान श्री राम और माता जानकी की ऐसे भक्तों पर विशेष कृपा रहती है क्योंकि गुरु की भक्ति ईश्वर की भक्ति है गुरु का बताया मार्ग ईश्वर का बताया मार्ग है क्योंकि सत्गुरुओं के हृदय में भगवान राम बसे हुए हैं उनके रोम रोम में भगवान राम सामये हुए हैं और राम के हृदय में गुरुजन संत महापुरुष सामेय हुए हैं क्योंकि जो राम के हैं राम उनके हैं और संत महापुरुष ताउम्र भगवान श्री राम भगवान श्री हरि विष्णु भगवान संकट मोचन कृपा निधान वीर बजरंगबली हनुमान की आराधना में लीन रहते हैं और मैं आपकी जानकारी के लियें बता दूं कि जब-जब इस धरती पर भगवान अवतरित हुए हैं तो उन्हें भी सतगुरु के मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ी है तो हम तो एक मामूली से इंसान है सतगुरु ही होते हैं जो हमारी उंगली पड़कर हमें भवसागर पार कराते है और भंवर में हमारी नाव डूबने से बचाते हैं इस अवसर पर एक विशाल संत भंडारे के साथ-साथ आश्रम में यज्ञ अनुष्ठान भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमें हरिद्वार के अनेको मठ मंदिर आश्रम से पधारे संत महापुरुषों ने अपने श्री मुख से भक्तजनों पर दिव्या कल्याणकारी ज्ञान की वर्षा की एवं भंडारे में सभी ने आयोजित भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया इस अवसर पर महामंडलेश्वर रामेश्वर दास महाराज ने कहा राम ही सूरत राम ही मूरत राम ही पीड़ा राम ही मरहम राम करे उपचार रे भगवान राम इस सृष्टि के कण-कण में समाये हुए हैं वे तुम्हारे अंदर भी है और मेरे हृदय में भी है आवश्यकता है सच्चे मन से पुकारने की वे दौड़े चले आयेंगे भगवान राम तो भाव के भूखे हैं इस अवसर पर महंत बलराम दास महाराज महंत प्रकाशानन्द महाराज महंत रामकुमार दास महाराज महंत गणेश दास महाराज महंत रामदास महाराज महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज महंत प्रेमानंद महाराज कोतवाल रामदास महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित थे सभी ने भक्त जनों पर अपने ज्ञान की वर्षा की।