मनुष्य अगर तन का काला है और उसके कर्म अच्छे हैं तो उसका जीवन धन्य है तन का काला चल सकता है पर मन का काला ईश्वर को पसंद नहीं स्वामी अमृतानन्द महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार 2 जून 2025( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) कार्ष्णि भक्ति धाम गाजीवाला आर्य नगर में पावन श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का श्रवण कराते हुए कथा व्यास स्वामी सुमेधानन्द महाराज ने कहा श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सभी ग्रंथों का सार है और भगवान श्री कृष्णा का साक्षात विग्रह है इस पावन कथा का श्रवण करने मात्र से दुष्ट से दुष्ट परवर्ती के व्यक्ति को भी मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है इस अवसर पर पूज्य ज्ञान मूर्ति ब्रह्मनिष्ट अनंत विभूषित त्याग मूर्ति स्वामी अमृतानन्द महाराज ने कहां इस संसार में तन का काला मनुष्य ईश्वर की कृपा से अपने अच्छे कर्मों से अपने आप को निखार सकता है किंतु मन का काला खुद तो डूबता ही है दूसरों को भी ले डूबता है इसलिये मनुष्य को सदैव उच्च विचारवान अच्छे संस्कार अपने हृदय में बसा कर रखना चाहिये दूसरों के प्रति द्वेष भाव नहीं रखना चाहिये क्योंकि जलन भाव द्वेष भाव ईश्वर को पसंद नहीं जलन तथा द्वेष भाव सदैव दुष्ट प्रवृत्ति के मन की दरिंदगी तथा असंतोष रखने वाले लोग की पहचान है ऐसे लोग अच्छे नहीं होते ऐसे लोग दीवार के अंदर दरार में बैठे सर्प के सामान होते हैं और ऐसे व्यक्ति को मृत्यु के उपरांत सर्प योनि प्राप्त होती है वह सैकड़ो वर्षों तक इधर-उधर इस योनि में भटकता रहता है अगर अपना कल्याण चाहते हो तो हरि भजन करो सत्य की राह चुनो मन में सद्भावना रखो दूसरों के प्रति अच्छे विचार रखो निर्बल प्राणियों पर दया भाव रखो दरिद्र जनों पर दया भाव रखो नहीं तो आपकी असुर प्रवृत्ति आपके इस लोक को तो खराब कर ही देगी परलोक को भी खराब कर देगी मन में यह भाव बसा होना चाहिए राम ही सूरत राम ही मूरत राम ही तुझ में राम ही मुझ में राम ही पीड़ा राम ही मरहम और राम करे उपचार रे अपने चित् को सदैव कन्हैया के श्री चरणों में रखो कन्हैया आपके जीवन की नैया को पार लगा देंगे इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत कमलेश्वरानन्द सरस्वती महाराज ने कहा जिसके मन में सद्भावना बसी हो सभी के प्रति अच्छे भाव बसे हो उसका सदैव कल्याण होता है भक्त प्रहलाद ने राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी भगवान हरि की भक्ति से अपने जीवन को धन्य कर लिया और युगों युगों तक अमर हो गयी उनकी यश और कीर्ति जिसका चित् भगवान श्री हरि के चरणों में रहता है उसके मन में द्वेष भाव का कोई स्थान होता ही नहीं इस अवसर पर बोलते हुए महंत स्वामी सत्यव्रतानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा त्याग और समर्पण और संतोष बड़ी ही अनमोल निधि है यह है जिसके जीवन में हो उसका मंगल ही मंगल है भगवान श्री हरि की महिमा का गुणगान सुनना हर किसी के भाग्य में नहीं होता और जिन्हें सुनने का अवसर मिलता है वह लोग बड़े ही भाग्यशाली होते हैं आज कथा में भगवान श्री राम का प्रकटो उत्सव तथा भगवान राम के जन्म की महिमा का बड़ा ही सुंदर दृष्टांत सुनने के लियें मिला कार्यक्रम में महंत स्वामी सत्यव्रतानन्द सरस्वती महंत स्वामी प्रतिभानंद महाराज महंत कमलेश्वरानन्द महाराज स्वामी साधनानंद महाराज ब्रह्मचारी दिव्य चैतन्य स्वामी विशुद्धानंद महाराज महंत वीरेंद्र स्वरूप महाराज महंत सूरज दास महाराज सहित बहुत से संत महापुरुष उपस्थित थे भारी संख्या में भक्तजन नित्य कथा का श्रवण कर रहे हैं।