सतगुरु का ज्ञान अनंत है सतगुरु तारणहार परम पूज्य साकेतवासी श्री महंत रघुवीर दास महाराज की 17वीं के अवसर पर बोले श्री महंत विष्णु दास महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार 23 जून 2025( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) भूपत वाला मुखिया गली स्थित श्री साकेत धाम आश्रम के श्री महंत 1008 साकेतवासी रघुवीर दास महाराज का साकेतवास हो जाने के पश्चात उनके कृपा पात्र शिष्य श्री महंत रामानुज दास महाराज तथा वैष्णव मंडल के संत महापुरुषों के पतित पावन सानिध्य में 17वीं के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा तथा भंडारे का आयोजन किया गया इस अवसर पर बोलते हुए श्री गुरु राम सेवक उछाली आश्रम के परमाध्यक्ष ज्ञानमणी परम विद्वान तपस्वी श्री महंत विष्णु दास जी महाराज ने कहा सतगुरु तारणहार है सतगुरु ही मेरे राम सतगुरु भव की नाव है सतगुरु चारों धाम सतगुरु चरण वैकुण्ठ है सतगुरु ही हरि निज धाम सतगुरु तारणहार है सतगुरु ही मेरे राम अनंत विभूषित श्री महंत विष्णु दास जी महाराज ने कहा श्री महंत 1008 साकेतवासी रघुवीर दास जी महाराज ज्ञान का एक गंगासागर थे उनमें सदैव ज्ञान रूपी अमृत कलश का प्रवाह होता था ऐसे तपो मूर्ति गुरुदेव के ज्ञान का जिन भक्तों ने वर्ण किया है उनका लोक एवम परलोक दोनों सुधर गये सतगुरु ही मझधार है सतगुरु ज्ञान अपार सतगुरु ही मेरे राम है सतगुरु ही घनश्याम सतगुरु रूप अनंत है सतगुरु लगावे पार सतगुरु भव की नाव है सतगुरु मेरे राम अतः कहने का मतलब यह है ऐसे पावन सतगुरु जिनके ज्ञान की डोर सीधे भगवान से जुड़ी हुई थी हम लोगों को उनके ज्ञान के सरोवर में स्नान कर अपने इस मानव जीवन को धन्य तथा सार्थक करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और उनके अनंत सेवा भावी शिष्य श्री महंत राम अनुज दास जी महाराज मे हमें उन्हीं की छवि दिखायी दे रही है उन्हीं के जैसा अनंत प्रेम उन्हीं के जैसा अनंत ज्ञान और उन्हीं के जैसा वैराग्य दिख रहा है क्योंकि वह ऐसे सतगुरु देव के कृपा पात्र शिष्य हैं उन्हें उनके ज्ञान का अमृत पान उनके निकट रहकर करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है सतगुरु बहतानीर है सतगुरु जगत की प्रीत सतगुरु अमृत रूप है सतगुरु वचन अनंत है सतगुरु सत्य का मार्ग हर में हरि निहार के हर से करो मिलाप घृणा द्वेष फिर क्यों रहे सब है अपना आप अंतर्मुख साधन करो सरल रखो व्यवहार राग द्वेष सब छोड़ कर सबसे करो प्यार परम विद्वान संत शिरोमणि ज्ञान मूर्ति श्री महंत विष्णु दास जी महाराज ने कहा घृणा को प्रेम से जीतो क्रोध को क्षमा से लोभ को संतोष से जीतो और मोह को वैराग्य से जीतो काम को आत्मा से जीतो और दमन से जीतो संसार का कोई पद पदार्थ वाणी बंधन और कारण नहीं आता कारण में छुपा राज तथा द्वेष बंधन का कारण है यही विचार परम वंदनीय साकेतवासी महंत रघुवीर दास जी महाराज के थे जो उनके द्वारा दिये गये सारस्वत ज्ञान के रूप में सदैव हमारे स्मृति पटल पर बने रहेंगे सतगुरु देव कहीं जाते नहीं सतगुरु है अवतार सूक्ष्म रूप में सदा रहे वाणी और विचार इस अवसर पर बोलते हुए साकेतवासी श्री महंत रघुवीर दास महाराज के अनंत सेवाभावी शिष्य श्री महंत रामानुज दास महाराज ने कहा मेरे सतगुरु भगवान साक्षात ईश्वर की प्रतिमूर्ति थी जो उनके द्वारा प्रदान किये गये ज्ञान के रूप में सदैव हम लोगों के हृदय में वास करते रहेंगे सतगुरु देव का ज्ञान एक सागर के सामान हम तो उनके सामने एक सागर को गागर दिखाने के सामान है सतगुरु पार ब्रह्म है सतगुरु परम अवतार सतगुरु तारणहार है सतगुरु गंगा धार सतगुरु ज्ञान अनंत है सतगुरु प्रीति अनंत सतगुरु सीताराम है सतगुरु चारों धाम जो भक्त अपने सतगुरु के बतायें मार्ग पर चलते हैं उनका सदैव कल्याण होता है जो सतगुरु देव भगवान के श्री मुख से प्रेम और ज्ञान की अनंत गंगा बह रही थी आज उनकी 17वीं के अवसर पर संत रूपी दिव्य मूर्तियों के श्रीमुख से बह रही है उसका अमृत पान कर भक्त अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ करें इस अवसर पर वृंदावन से पधारे परम तपस्वी श्री महंत सुतीक्ष्ण दास जी महाराज ने कहा परम पूज्य ज्ञान मूर्ति रघुवीर दास जी महाराज ज्ञान का एक विशाल सूर्य थे उनके ज्ञान का दिव्य प्रकाश सदैव भक्तजनों के बीच एवं उनके उत्तराधिकारी के रूप में श्री महंत रामानुज दास जी महाराज के बीच सदैव विद्यमान रहेगा पहले श्री महंत रघुवीर दास जी महाराज ज्ञान का अमृत पान कर कर हम लोगों के जीवन को धन्य किया करते थे और अब उनके सेवा भावी शिष्य जो कि उन्ही की तरह ज्ञान त्याग और वैराग्य की साक्षात मूर्ति है श्री रामानुज दास जी महाराज हमारे बीच भक्तों के बीच ज्ञान की अमृत वर्षा करेंगे इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत दुर्गा दास जी महाराज ने कहा श्री महंत रघुवीर दास जी महाराज का ज्ञान अनंत था ऐसी तपस्वी ज्ञान मूर्ति संतो के दर्शन बड़े ही सौभाग्य से प्राप्त होते सतगुरु ज्ञान अनंत है सतगुरु भव का मार्ग है सतगुरु ही मझधार है सतगुरु तारणहार जो भक्त गुरु के बताये मार्ग पर चलते हैं उनका सदैव कल्याण होता है इस अवसर पर बोलते हुए महंत प्रहलाद दास महाराज ने कहा सतगुरु प्रेम अनंत है सतगुरु मेरे प्यारे सतगुरु जग के तारण हारे अवगुण दूर भगाने वाले अतः कहने का मतलब यह है सतगुरु के श्री मुख से निकलने वाला ज्ञान सेतु के रूप में भवसागर जाने वाले मार्ग के रूप में कार्य करता है और सतगुरु कदम कदम पर हमारा मार्ग दर्शन करते हैं इस अवसर पर श्री महंत दुर्गादास महाराज श्री महंत विष्णु दास महाराज श्री महंत हरिदास महाराज श्री महंत गंगा दास महाराज श्री महंत प्रेमदास महाराज महंत प्रमोद दास महाराज महंत बिहारी शरण महाराज महंत प्रहलाद दास महाराज महंत सीताराम दास महाराज महंत कन्हैया दास महाराज श्री सुसांग दास महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल धर्मदास महाराज कोतवाल रामदास महाराज सहित वैष्णव मंडल तथा वैष्णव विरक्त मंडल सहित सभी आश्रमों से आये महंत श्री महंत महामंडलेश्वर तथा संत महापुरुष उपस्थित थे सभी ने परम पूज्य श्री महंत रघुवीर दास महाराज को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये तथा आयोजित विशाल भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया।