बारिश का अलर्ट और पीसीएस परीक्षा: छात्रों की चिंता को नज़र अंदाज़ करती सरकार-अनिल चौधरी

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार,मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रदेशभर में आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न होने की चेतावनी दी गई है। वहीं दूसरी ओर, सरकार और लोक सेवा आयोग अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत पीसीएस उत्तराखंड परीक्षा आयोजित कराने पर अड़ी हुई है। इस परीक्षा में भाग लेने वाले हजारों छात्र-छात्राएं चिंतित हैं—क्योंकि उनका सामना अब न सिर्फ परीक्षा से है, बल्कि खराब मौसम, जलभराव और संभावित आपदा से भी है।
 
मुख्यमंत्री द्वारा विद्यार्थियों से “समय से पहले केंद्रों पर पहुँचने” की अपील की गई है। सवाल यह उठता है कि जब मौसम विभाग खुद लोगों को घर से बाहर निकलने से मना कर रहा है, तब छात्रों से परीक्षा केंद्र तक पहुँचने की उम्मीद करना कितना उचित है?
अगर रास्ते में कहीं 2 से 3 फीट तक पानी भर जाए, सड़कें धंस जाएं या रास्ते बंद हो जाएं, तो छात्र कैसे समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुँचेंगे? क्या सरकार या आयोग ने इन संभावनाओं को गंभीरता से लिया है? अगर किसी छात्र के साथ रास्ते में कोई अनहोनी हो जाती है, तो क्या सिर्फ “सांत्वना” देना ही सरकार की ज़िम्मेदारी रह गई है?
उत्तराखंड बसपा के ज़िला अध्यक्ष हरिद्वार अनिल चौधरी ने इस संबंध में लोक सेवा आयोग से मांग की है कि परीक्षा को मौसम सामान्य होने तक स्थगित किया जाए। यह कोई असामान्य या अनुचित मांग नहीं है, बल्कि छात्रों की सुरक्षा और उनके भविष्य की चिंता को दर्शाता एक जिम्मेदार कदम है।
यूपी में जब बसपा की सरकार रही, तब विद्यार्थियों की परिस्थितियों और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती थी। उत्तराखंड में भी यही अपेक्षा की जाती है। क्या दो महीने परीक्षा को आगे बढ़ा देने से सरकार की व्यवस्था चरमरा जाएगी? नहीं। लेकिन इससे छात्रों के मन का तनाव कम हो सकता है और परीक्षा निष्पक्ष व सुरक्षित वातावरण में हो सकती है।
सरकार को चाहिए कि वह मौसम की गंभीरता को समझे और विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे। आज का निर्णय उनके भविष्य और जीवन दोनों को प्रभावित कर सकता है।