जब मन में भक्ति का वास हो जाता है तो तन और मन आनन्दित हो उठना है श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार श्यामपुर स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम के परमाध्यक्ष श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज ने कहा जिसके हृदय में भक्ति का वास हो जाता है उसका तन मन शरीर का रोम रोम भक्ति रस में झूमने लगता है उसे जमाने से कुछ खास लेना देना नहीं होता वह भगवान हरि की भक्ति में इतना लीन रहता है की जमाने भर की उसे शुद्ध ही नहीं रहती अगर आवश्यकता है तो अपने तन मन और हृदय में भगवान हरि को बसाने की जहां भगवान हरि का वास हो जाता है जिसके हृदय में भक्ति हिलोरे मारने लगती है उसे क्या भला है और क्या बुरा है इससे कोई लेना-देना नहीं होता वह तो अपने आराध्य की भक्ति में लीन रहता है उस पर तेरा मेरा का या कलयुग का कोई प्रभाव नहीं होता भक्ति रस जीवन कल्याण सुधा रस है मीरा ने भक्ति की तो कान्हा को भगवान के रूप में पाया राधा ने भक्ति की तो सखा के रूप में पाया और माता रुक्मणी ने भक्ति की तो पति के रूप में पाया जैसी जिसकी भावना रही जैसी जिसकी सोच रही इस रूप में उसे ईश्वर की प्राप्ति हुई।