भगवान को सच्चे हृदय से पुकार लगाने मात्र से भगवान किसी न किसी रूप में आपकी सहायता के लियें दौड़े चले आते हैं श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार श्यामपुर स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम के परमाध्यक्ष श्री महंत श्याम सुंदर दास महाराज ने भक्तजनों के बीच उद्गार व्यक्त करते हुए कहा भगवान को अगर सच्चे हृदय से पुकारा जाये तो भक्तों की पुकार सुनकर भगवान किसी न किसी रूप में उसकी मदद के लियें दौड़े चले आते भक्ति भगवान एवम भक्त के बीच सेतु का कार्य करती है आवश्यकता है भक्ति और भगवान को अपने हृदय में बसाने भक्ति मनुष्य के मन का ईश्वर के प्रति एक भाव है जैसे आपने ईश्वर का नाम पुकारा उनकी महिमा का वर्णन सुना तथा ईश्वर की महिमा के गुणगान से जो आपके मन में भाव उत्पन्न हुआ वह परम सुख प्रदान करने वाला होता है ईश्वर की अनुभूति करने वाला होता है और भवसागर की और जाने वाला मार्ग भी यही है और सतगुरु देव भवसागर पार जाने की युक्ति बताने वाले तारण हार है राम नाम तीन आखर का महज एक शब्द लगता है किंतु राम नाम जीवन सुधा रस है और इन तीन अक्षरों के शब्द में संपूर्ण त्रिकोल समाया है तीनों लोक इस राम नाम की आभा से प्रकाश मान हो रहे हैं अगर जीवन में त्याग और समर्पण की शिक्षा लेनी है तो भगवान श्री राम के जीवन से लो उन्होंने पितृ आज्ञा माता आज्ञा और गुरु आज्ञा के लियें और उनका मन आहत न हो इसलिये राजपाठ और वैभव और सभी सुखों का त्याग कर वनवास जाना स्वीकार किया और अगर समर्पण भाव देखना है भाई के प्रति प्रेम देखना है तो इसकी शिक्षा भरत जी के जीवन से ले लक्ष्मण जी के जीवन से ले उन्होंने अपने भाई भगवान श्री राम की भावना आहत न हो इसलिये उनकी चरण पादुका शीश पर धारण कर उनकी आज्ञा से उन्हीं की तरह नगर के समीप वन में रहकर राजभोग त्याग कर एक संत की तरह 14 वर्ष तक जीवन व्यक्तित किया और लक्ष्मण जी ने पूरे 14 वर्ष तक बिना सोये राम सिया की सेवा की और अगर भक्ति देखनी है और शिक्षा लेनी है तो संकट मोचन कृपा निधान वीर बजरंगी बली के जीवन से भक्त की शिक्षा लें जिन्होंने राम नाम की भक्ति में लीन होकर सौकोष का समुद्र तक लाघ दिया और चरणों में बैठकर राम के हो गये शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि अगर भगवान राम को मिलना है भगवान राम को प्राप्त करना है उनके दर्शन करने हैं तो पहले हनुमान जी को मनाना होगा राम नाम ऊपरी मन से भजने से कुछ नहीं होता राम नाम का रस अपने जीवन में घोट कर पीना पड़ता है भगवान राम को हृदय में बसाना पड़ता है और भगवान राम का हो जाना पड़ता है राम नाम की भक्ति में इतने लीन हो जाओ की भगवान राम का तेज और भगवान राम की आभा आपके मन मस्तिष्क पर दूसरों को प्रदर्शित होने लगे और जीवन में अगर सबर की शिक्षा लेनी है तो माता शबरी के जीवन से लो उन्होंने अपने गुरु की आज्ञा से वन में रहकर सदियों तक भगवान राम के आने की प्रतीक्षा की और सदियों तक राम नाम का जाप किया तब जाकर एक दिन उनकी कुटिया में भगवान राम पथारे गुरु की भक्ति एवम गुरु की सेवा मनुष्य के जन्मो जन्म के पुण्यों के उदय होने से प्राप्त होती है हमारे सतगुरु जगत कल्याण की भावना लेकर सदैव तपस्या में लीन रहते हैं सांसारिक जीवन के संपूर्ण सुख सुविधा और मोह त्याग कर दूसरों के कल्याण की भावना लेकर ईश्वर भक्ति में लीन रहते है जो भक्त सच्चे मन से गुरु के बताये मार्ग पर चलते हैं एवम गुरु की भक्ति करते भगवान श्री राम और माता जानकी की ऐसे भक्तों पर विशेष कृपा रहती है क्योंकि गुरु की भक्ति ईश्वर की भक्ति है गुरु का बताया मार्ग ईश्वर का बताया मार्ग है क्योंकि सत्गुरुओं के हृदय में भगवान राम बसे हुए हैं उनके रोम रोम में भगवान राम सामये हुए हैं और राम के हृदय में गुरुजन संत महापुरुष सामेय हुए हैं क्योंकि जो राम के हैं राम उनके हैं और संत महापुरुष ताउम्र भगवान श्री राम भगवान श्री हरि विष्णु भगवान संकट मोचन कृपा निधान वीर बजरंगबली हनुमान की आराधना में लीन रहते हैं और मैं आपकी जानकारी के लियें बता दूं कि जब-जब इस धरती पर भगवान अवतरित हुए हैं तो उन्हें भी सतगुरु के मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ी है तो हम तो एक मामूली से इंसान है सतगुरु ही होते हैं जो हमारी उंगली पड़कर हमें भवसागर पार कराते है राम ही सूरत राम ही मूरत राम ही पीड़ा राम ही मरहम राम करे उपचार रे भगवान राम इस सृष्टि के कण-कण में समाये हुए हैं वे तुम्हारे अंदर भी है और मेरे हृदय में भी है आवश्यकता है सच्चे मन से पुकारने की वे दौड़े चले आयेंगे कभी अपने हृदय में भगवान राम को भगवान श्री हरि को बस कर तो देखो।