मनुष्य के व्यवहार की खूबसूरती दूसरों के मन में खूबसूरत पलों के रूप में संजोयी जानी चाहिये श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) श्यामपुर स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम के परमाध्यक्ष अनंत विभूषित श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज ने कहा अपने व्यवहार को ऐसा बनाये कि दूसरे लोग आपके साथ बिताये कुछ पलों को अपनी खूबसूरत यादों के तौर पर ताउम्र अपने मस्तिष्क में धारण कर संजो कर रख सके आजकल मनुष्य पश्चात संस्कृति को अपना रहा है दूसरे से मिलने पर गुड मॉर्निंग तथा अन्य संबोधन करता है अपनी प्राचीन सभ्यता राम-राम जी बोलना भूलता जा रहा है उसे पता नहीं कि उसकी गुड मॉर्निंग गुड आफ्टरनून किसी काम की नहीं राम राम जी बोलना हमारी प्राचीन सभ्यता है भगवान राम का हम दूसरे से मिलने पर भी बार-बार संबोधन कर रहे हैं यह हमारी संस्कृति है और कल्याण का मार्ग भी है एक किस्म से यह संबोधन राम का भजन भी करा देता 108 मनको की माला फेरते हुए मनुष्य का मन एकाग्र नहीं हो पाता किंतु आप उसके हाथ में पांच ₹500 के नोटों की गडड़ी दे दे उसे वह बड़े ध्यान से पूरी एकाग्रता के साथ गीन कर लेगा तो यह एकाग्रता हरि भजन में क्यों नहीं दोहरा मापदंड क्यों ऊपरी मन से किया गया भजन कभी सार्थक नहीं होता चाहे पल भर का भजन करो संपूर्ण एकाग्रता के साथ करो दुनियादारी से उस समय अपना नाता कुछ पल के लियें तोड़ लो ताकि भजन की जगह तेरा मेरा मे आपका मन ना फसा रहे और माला कहीं फिर रहे हैं और ध्यान कहीं है ऐसा नहीं होना चाहिये संपूर्ण एकाग्रता के साथ राम भजन करो यह इस लोक में भी काम आयेगा और परलोक में भी