गुरु कृपा भव तारिणी गुरु मिलाये राम बोले श्री महंत जयरामदास महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार ब्रह्मपुरी स्थित श्री वशिष्ठ दूधाधारी सप्त ऋषि आश्रम श्री संकट मोचन 11 मुखी हनुमान मंदिर में वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर श्री महंत कृपा सिंधु दास जी महाराज ने विशाल संत समागम तथा भंडारे का आयोजन किया इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत जयराम दास महाराज ने कहा गुरु कृपा भव तारिणी होने के साथ भगवान राम तक पहुंचाने का मार्ग भी प्रदर्शित करती हैं साथ ही हमारे गुरुजन हमारे मन मस्तिष्क में ज्ञान का सृजन कर हमारे जीवन का काया पलट कर देते हैं हमारे सतगुरु के पास ही भगवान राम तक पहुंचाने की युक्ति है जो दान सत्कर्म भजन सत्संग कथा पाठ पूजा के माध्यम से भगवान तक पहुंचाने का हमें मार्ग प्रदर्शित कर देते हैं सतगुरु के एक-एक वचन में जीवन की सार्थकता छिपी रहती है सतगुरु मिलाये राम से सतगुरु करें भव पार सतगुरु पार ब्रह्म है वहीं मिलाये राम इस अवसर पर बोलते हुए श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े के परमाध्यक्ष श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा सतगुरु देव इस पृथ्वी लोक पर साक्षात ज्ञान का गंगासागर होते हैं ज्ञान की सभी सरिताये उन्हीं के मन मस्तिष्क में एक स्वरूप में आकर समाहित होती है इस ज्ञान के मार्गदर्शन से हमें गुरुदेव जीवन सार्थक करने की युक्ति बताते हैं इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत कृपा सिंधु दास महाराज ने कहा इस पृथ्वी लोक पर जो भी आया है उसे इस संसार से एक दिन जाना है और हमें पूरा प्रयास करना चाहिये की जो हम कर्म कर रहे हैं व किसी प्रकार से जन्मो जन्म का प्रारब्ध ना बने अन्यथा इस जन्म के करे हुए कर्मों फिर आपको अपने कर्मों का फल भोगने के लियें किसी अन्य योनि में या किसी न किसी रूप में इस पृथ्वी पर आना ही होगा अपने कर्मों के फल और उसके भोग से आज तक कोई नहीं बच पाया है देवी देवताओं को भी अपने कर्मों का फल इस सृष्टि चक्र में भोगना ही पड़ता है राम ही सूरत राम ही मूरत राम ही पीड़ा राम ही मरहम राम करे उपचार रे कहने का मतलब सिर्फ इतना है जिन्हें तुम इस संसार में ढूंढते फिर रहे और जो इस सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है वह तुम्हारे ह्रदय में भी विराजमान है और मेरे हृदय में भी विराजमान है लेकिन आवश्यकता है श्रद्धा सच्चे भाव की एक बार सच्ची श्रद्धा सच्चा भाव अपने मन मस्तिष्क धरण तो करो भगवान से मिलने के लिये सब्र की आवश्यकता होती है जो सबर माता शबरी ने अपने मन में धारण किया था वही सब्र मनुष्य को अपने चित् में धारण करना पड़ता है तभी भगवान राम के दर्शन हो पाते इस भंडारे का आयोजन श्री महंत कृपा सिंधु दास महाराज ने परम पूज्य महंत जयराम दास जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न किया इस अवसर पर महंत नारायण दास पटवारी महंत सूरज दास महाराज महंत साध्वी गंगादास महाराज महंत रविंद्र बिहार दास महंत रघुवर दास महाराज महेंद्र घनश्याम दास महाराज महंत सूरज दास महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल धर्मदास महाराज कोषाध्यक्ष कृष्ण मुरारी अग्रवाल सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे।