गुरु की भक्ति एवम गुरु की सेवा जन्मो जन्म के पुण्यों के उदय होने से प्राप्त होती है श्री श्री आनंदमयी साधना मां

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) कनखल दक्ष रोड स्थित श्री माधव आश्रम श्री श्री मां आनंदमयी कविता मां आश्रम में भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए श्री श्री आनंदमयी साधना मां ने कहा गुरु की भक्ति एवम गुरु सेवा भी ईश्वर भक्ति में ही निहित है और गुरु की सेवा का अवसर हमें जन्मो जन्म के पुण्यों के उदय होने से प्राप्त होता है हमारे सतगुरु दिन-रात ईश्वर की आराधना में लीन रहते हैं तपस्वी ज्ञान मूर्ति संत जगत कल्याण के लियें जगत के सभी कार्यों से विरक्त होकर जगत के उद्धार हेतु ईश्वर आराधना में लीन रहते हैं जिस प्रकार हनुमान जी की आराधना करने से भगवान राम प्रसन्न हो जाते हैं इसी प्रकार जो भक्त गुरु के बताये मार्ग पर चलते हैं गुरु की भक्ति करते हैं तथा सतगुरु के बतायें मार्ग का अनुसरण करते हैं ऐसे भक्तों से भगवान हमेशा प्रसन्न रहते हैं आप उनकी भक्ति कर रहे हैं जो ईश्वर की भक्ति कर रहे हैं आपकी भक्ति भी गुरु की भक्ति में निहित होकर ईश्वर से जा मिलती है और सार्थक हो जाती है गुरु कृपा से महक उठता है आपका जीवन आपके भाग्य का ईश्वर कृपा से उदय हो जाता है ईश्वर के प्रति लग्न सोच और गुरु के प्रति सच्ची आस्था से मन मस्तिष्क धन्य हो जाता है यह मानव जीवन हमारे सतगुरु ही सार्थक कर सकते हैं हमें बता सकते हैं कि हम सिर्फ पेट भरने के लियें है इस पृथ्वी पर नहीं आये बल्के दूसरों की खुशी में भी अपनी खुशी ढूंढ सकते हैं किसी पीड़ितअसहाय व्यक्ति बच्चे दुर्लभ व्यक्ति की सेवा कर उसकी सूक्ष्म इच्छा पूर्ति कर जो उसके चेहरे पर खुशी आती है उसका वर्ण कर अपने जीवन को धन्य तथा सौभाग्यशाली समझ सकते हैं दूसरो की खुशियों से अपने जीवन को महका सकते हैं ईश्वर देख रहा है कि आप क्या कर रहे हैं आप कमरे में छिपकर कोई बरा कर्म कर सकते हैं वह इस जमाने के लोगों से छुप सकता है किंतु ईश्वर से नहीं छुप सकता जब आप ईश्वर की अदालत में जायेंगे तो आपकी हर अच्छे बुरे एक-एक पल का हिसाब होगा इसलिये जो भी करना है ईश्वर देख रहा है इस भाव के साथ करो नहीं तो आपके कर्म ही आपको उस लोक में सिद्ध करेंगे कि आपका मानव जीवन सार्थक हुआ या निरार्थक या सदियों तक आप अपने कर्मों का फल भोगेंगे अगर नहीं तो सत्य के मार्ग पर चलो गुरुजनों की सेवा करो दुर्लभ लोगों और जीवो पर दया करो और ईश्वर में आस्था रखो यही कल्याण का मार्ग है यही जीवन को सार्थक करने का मार्ग है।