9 अगस्त क्रांति दिवस धूमधाम से मनाया गया -मोनिक धवन

हरिद्वार,महानगर युवा इंटक के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने मोनिक धवन के नेतृत्व में गांधी पार्क भेल जाकर वृक्षारोपण किया और महात्मा गांधी के स्टैचू पर माल अर्पण कर नारे लगाए जब तक सूरज चांद रहेगा महात्मा गांधी आपका नाम रहेगा कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद, इस लड़ाई में गांधी जी ने करो या मरो का नारा देकर अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए पूरे भारत में युवाओं का अहान किया था यही वजह है कि भारत छोड़ो आंदोलन या क्विट इंडिया मूवमेंट भी कहते हैं इस आंदोलन की शुरुआत 9 अगस्त 1942 में हुई थी इसलिए इसे अगस्त क्रांति भी कहते हैं 9 अगस्त लेकर रहेंगे हमारे देश के लंबे इतिहास में पहली बार करोड़ों लोगों ने आजादी को अपनी इच्छा जहीर की थी कुछ लोगों ने इस पर जोरदार ढंग से भी प्रकट किया गया था मंजू रानी ने बताया अगस्त क्रांति यानी 9 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अगस्त क्रांति के नाम से मशहूर भारत छोड़ो आंदोलन का करीब तीन-चार साल का दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण होने के साथ पेचीदा भी था यह आंदोलन देशव्यापी था जिसमें बड़े पैमाने पर भारत की जनता ने हिस्सेदारी की और आबादपुर साहस और सहनशीलता का परिचय दिया महेंद्र गुप्ता जी ने लोहिया ने ट्रस्ट की हवाले से लिखा था कि रूस की क्रांति में वहां की सिर्फ एक प्रतिशत जनता ने हिस्सा लिया था जबकि भारत की अगस्त क्रांति में देश के 20% लोगों ने हिस्सेदारी की थी 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित हुआ था और 9 अगस्त को रात को कांग्रेस के बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए थे इस वजह से इस आंदोलन को सुनिश्चित कार्य योजना नहीं बन पाई कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का पैसा कृत युवा नेतृत्व सक्रिय था लेकिन उसे भूमिगत रहकर काम करना पड़ रहा था इसी दौरान जेपी ने क्रांतिकारियों का मार्गदर्शन करना है उनका हौसला अफजाई करने और आंदोलन का चरित्र और तरीका स्पष्ट करने वाला आजादी के सैनिकों का नाम दो लंबे पत्र अज्ञात स्थान से लिखिए भारत छोड़ो आंदोलन के महत्व का एक पक्ष यह भी था कि आंदोलन के दौरान जनता खुद अपनी नेता थी वीरेंद्र भारद्वाज ने कहा भारत छोड़ो आंदोलन देश की आजादी के लिए एक निर्णायक मोड़ था विभिन्न स्रोतों से आजादी की जो इच्छा और उसे हासिल करने की जो ताकत भारत में बनी थी उसका अंतिम प्रदर्शन भारत छोड़ो आंदोलन में हुआ आंदोलन में इस बात का निर्णय किया गया की आजादी की इच्छा में भले ही नेताओं का भी साथ था लेकिन उसे हासिल करने की ताकत निर्णायक रूप से जनता की थी फैयाज अली ने बताया यह ध्यान देने की बात है कि गांधीजी ने आंदोलन को समावेशी बनाने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में दिए अपने भाषण में समाज के सभी तबकों को संबोधित किया था जनता पत्रकार नरेश सरकारी अमला सैनिक विद्यार्थी आदि यहां तक कि उन्होंने अंग्रेज जो यूरोपीय देशों और मित्र राष्ट्रों को भी अपने उस भाषण के जरिए संबोधित किया था तभी तुमको और समूहों से देश के आजादी के लिए करो या मरो के उनके ज्ञापन अहान के आधार पर उनका पिछले 25 सालों के संघर्ष का अनुभव था भारत छोड़ो आंदोलन में के जो भी घटनाक्रम प्रभाव और विवाद रहे हो मूल बात थी कि भारत जनता में लंबे समय से चल रही आजादी की इच्छा का विस्फोट विनोद अरोड़ा ने बताया इस आंदोलन के दबाव में भारत के आधुनिक तावादी मध्यम वर्ग से लेकर संबंधी नरेश उत्तक को यह लग गया था कि अंग्रेजों को भारत छोड़ना होगा इसलिए अपने वर्ग स्वार्थ को बचाने और मजबूत करने की फिक्र उन्हें लगी प्रशासन का लोहा शिकंजा और उसे चलाने वाली भाषा तो अंग्रेजों की बनी ही रही साथ ही विकास का मॉडल भी वही रहा भारत का लोकतांत्रिक समाजवादी धर्मनिरपेक्ष संविधान भी पूंजीवादी सामंतवाद गठजोड़ की छाया से पूरी तरह नहीं बच पाया अंग्रेजों के वैभव और रोग की विरासत जिससे भारत की जनता के दिलों में बैठाया जाता था भारत के शासक वर्ग में अपनाएं रखी है उसे मजबूत करता चला गया गरीबी भ्रष्टाचार महंगाई बीमारी बेरोजगारी शोषण कुपोषण विस्थापन और किसानों की आत्महत्याओं का हलवा बने हिंदुस्तान में शासक वर्ग का यह में अश्लील जरूर लगता था लेकिन वह उसी में डूबा हुआ है सेवाग्राम साबरमती आश्रम के छोटे और कच्चे कक्षाओं में बैठकर गांधी दुनिया की सबसे बड़ी समाज ऐसा ही राजनीतिक कूटनीतिक विवाद करने में असुविधा नहीं हुई यहां तक कि अपना चिंतन लेखन आंदोलन करने में भी नहीं है लेकिन भारत के शासक वर्ग आंधी से कोई प्रेरणा नहीं ली गांधी का आदर्श अगर सही नहीं था तो सादगी का कोई आदर्श सामने रख सकते हैं लेकिन उनके जैसी कोई बात इतने वर्षों बाद आज तक नहीं देखी आज जमाने में राम मनोहर लोहिया में आजाद भारत के शासक वर्ग और शासन तंत्र सतत और विस्तृत आलोचना की थी उन्होंने उसे अंग्रेजी राज का विस्तार बताया था शायद में लगा था लगा होगा कि उनकी आलोचना से राजनेताओं से त्वरित बदलेगा छात्रवृत्ति आगे बढ़ेगी लेकिन इतने सालों बाद भी उनके इस कथन का जरा सा भी असर नहीं हुआ आज हम अगस्त क्रांति की बना रहे हैं तो सोचे कि क्या हम जनता का पक्ष मजबूत करना चाहते हैं या स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा प्रति प्रसंग और विभूतियों का उत्सव बना रहे हैं उनके साथ को खत्म कर देना चाहते हैं मौके पर मंजू रानी वीरेंद्र भारद्वाज महेंद्र गुप्ता फयाज अली विनोद अरोड़ा बिना कपूर मनोज महंत आदि उपस्थित रहे।