निरंजनी अखाड़े की छावनी मे चादरपोशी कर बनाए गए दो महामंडलेश्वर
सम्पादक प्रमोद कुमार
वरिष्ठ पत्रकार राकेश वालिया प्रयागराज,महाकुम्भ मे निरंजनी अखाड़े की छावनी में अखाड़े के पंच परमेश्वर और निरंजन पीठाधीश्वर की उपस्थिति में चादर पोशी कर दो महामंडलेश्वर बनाए गए. जिन पर संत महापुरुषों ने पुष्प वर्षा कर शुभकामनायें देते हुए उनके उज्वल भविष्य की कामना की।
 
निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशा नन्द गिरि ने कहा की संतों की वाणी में दिव्यता और शांति होती है,माँ सरस्वती का आशीर्वाद संतों के शब्दों में वास करता है। संतों का कथन सच्चाई, ज्ञान और भक्ति से ओत-प्रोत होता है, और यह सब माँ सरस्वती की कृपा से संभव होता है। वे अपनी वाणी से हमें सत्य की ओर मार्गदर्शन करते हैं, उन्होंने कहा की जिस महामंडलेश्वर की उपाधि से आज स्वामी पूर्णानन्द गिरि, निरंजनी अखाडा (कलोल,अहमदाबाद),
स्वामी काली चरण (हरियाणा)का पट्टा अभिषेक किया गया है उन्हें हम साधुवाद देते हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं जिससे वह सनातन की ख्याति को और बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि नव नियुक्त महामंडलेश्वर स्वामी कालीचरण आज के बाद महामंडलेश्वर स्वामी कालीचरण गिरी के नाम से जाने जाएंगे।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष श्री महेंद्र रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि हम नव नियुक्त महामंडलेश्वरों को शुभकामनाएं देते हुए हम यही कामना करते हैं कि वे अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएं। उनका मार्गदर्शन सभी भक्तों के लिए प्रेरणादायक हो और उनका कार्य क्षेत्र समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाए। उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए,कहा की कि वे दिव्य आशीर्वाद से हमेशा सुसज्जित रहें और उन्हें हर प्रयास में सफलता प्राप्त हो। इस अवसर पर अखाड़ा सचिव श्री महंत राम रतन गिरी, महामंडलेश्वरस्वामी ललित नंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानन्द गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी आदि योगी पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी सहजा नंद पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी जय गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी अन्नपूर्णा भारती,महंत दर्शन भारती, स्वामी रवि देव शास्त्री, स्वामी दिनेश दास, स्वामी निर्मल दास, श्री महंत राधे गिरी, श्री महंत ओमकार गिरी, श्री महंत दिनेश गिरी, महंत राजगीरी, महंत राकेश गिरी, महंत नरेश गिरी आदि के संग अनेक संत महापुरुष और श्रद्धालु मौजूद रहे।

