महाकुंभ में दास धर्म पंथ के अधिपति निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाश नन्द गिरि से उनके शिविर मैं भेट वार्ता की।

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सम्पादक प्रमोद कुमार

वरिष्ठ पत्रकार राकेश वालिया प्रयागराज, महाकुंभ में दास धर्म पंथ के अधिपति निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाश नन्द गिरि से उनके शिविर मैं भेट वार्ता करने पहुंचे, जहां स्वामी कैलाशा नन्द गिरी महाराज ने उनका शाल उढाकर स्वागत किया। देश की एकता और अखंडता कों क़ायम रखने के लिए चर्चा की।

 

निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाश नंद गिरी महाराज ने कहां की संत त्रिलोचन दास महाराज भारतीय संत परंपरा में एक महान संत हैं। महाकुंभ में हुई हृदय विदारक हादसे के समय जिस प्रकार से बेसहारा श्रद्धालुओं के सहारा बने और उनके प्राणों की रक्षा की उसके अनुरूप ऐसे महान संत का सम्मान सर्व संत समाज को करना चाहिए उन्होंने कहा कि संत त्रिलोचन दास की दया, भक्ति और आध्यात्मिक दृष्टि ने उन्हें एक अद्वितीय स्थान दिलवाया हैं। वे परमात्मा के प्रति अपनी अडिग श्रद्धा और सेवा भाव से मानवता की सेवा कर रहे हैं यह अपने आप में एक अद्भुत कार्य है। उनका जीवन और शिक्षाएँ आज भी अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

दास धर्म पंथ के अधिपति संत त्रिलोचन दास महाराज ने कहा कि आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलशा नन्द गिरी महाराज अपने जप तप के कारण पूरे विश्व में एक अलग पहचान बनाए हुए हैं ऐसे संतों का आशीर्वाद प्राप्त होना बहुत ही गर्व की बात है।उन्होंने कहा की संतों का हृदय बहुत कोमल होता है, वे दया, करुणा, और प्रेम के सागर होते हैं। लेकिन साथ ही, उनकी साधना और तप भी अत्यंत कठोर होते हैं। यह संतों की आंतरिक शक्ति और महानता को दर्शाता है। वे भले ही बाहरी दुनिया में मृदु और कोमल प्रतीत होते हों, लेकिन अंदर से वे आत्मसंयम, तप, और साधना में पूर्ण रूप से समर्पित होते हैं।उन्होंने कहा की यह सब विशेषता आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशा नन्द गिरि महाराज मे हैं।उन्होंने कहा की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाकुंभ में हुई घटना को लेकर जिस प्रकार भावुक हुए हैं उससे करोडो सनातन प्रेमियों की भावनाये उनसे जुड़ गईं हैं और वह एक अद्भुत और आस्थावन सनातन कों मानने वाले संत भी हैं। उन्होंने जिस प्रकार महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन को संभाला हुआ है वह चमत्कार से कम नहीं हैं।

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