मनुष्य कर्म में लिखी गरीबों को मिटा सकता है लेकिन विचारों की गरीबी कभी नहीं मिटती श्री श्री आनंदमयी साधना मां
सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) कनखल दक्ष रोड स्थित श्री माधव आश्रम मां आनंदमयीकविता मां आश्रम में भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए श्री श्री आनंदमयी साधना मां ने कहा मनुष्य कर्म में लिखी गरीबों को कर्म करके मिटा सकता है लेकिन जिसके मन मस्तिष्क में गरीबी बसी हो चाहे वह अरबपति भी क्यों ना हो किंतु उसके मन की गरीबी उसके संस्कारों की गरीबी उसके विचारों की गरीबी कभी नहीं मिटती आजकल आपने देखा होगा पहले गरीब का कपड़ा फट जाता था तो उसे सुई धागा लेकर सी लिया जाता था जैसे घुटने पर पैजामा या पेट फट गई तो उसे कपड़ा जोड़कर भले ही पहन लिया जाता था किंतु आजकल बड़े लोगों में चलन चला है घुटने पर ऊपर तथा कई कई जगह से कटी फटी पेंट बड़े-बड़े ब्रांडों के नाम पर पहनते हैं जो बड़े ही गंदे तथा भद्दी प्रदर्शित होती हैं आखिर फैशन के नाम पर दरिद्रता क्यों गरीब भी फटे हुए कपड़े को सिलकर पहन लेता है लेकिन जिनकी सोच में गरीबी बसी है वे लोग दिखावे के लियें ताकि लोगों का ध्यान उनकी ओर केंद्रित हो ऐसे भद्दी फटे लटके कपड़े पहनते हैं शरीर दिखाने वाले कपड़े पहनते हैं इस प्रकार के लोग भले ही धन से अमीर हो लेकिन सोच से गरीब होते हैं तन और मन दोनों से गरीब होते हैं उनकी सोच में उनके मस्तिष्क में गरीबी बसी होती है उनके संस्कारों में झूठी शान और दरिद्रता बसी होती है जबकि एक आम गरीब का मन प्रतिपुलित होता है हर वस्तु से लालसा से मुक्त होता है मनुष्य को हमेशा अच्छी संगत करनी चाहिये उम्र दराज लोगों के पास बैठकर उनके विचार ग्रहण करने चाहिये और जहां भी सत्संग हो रहा हो उसे ग्रहण करना चाहिये क्योंकि हरि भजन सत्संग ही आपको सत्य की राह दिखाता है आपको आपके अंदर छुपे गुणो से अवगत कराता है आपकी सुख समृद्धि का मार्ग खोलता हैं अच्छी उठ बैठ तथा संगत आपकी उन्नति के मार्ग में सहायक हो सकती है।
 

