भक्ति मनुष्य के जीवन को आनंद से भर देती है महंत जय रामदास महाराज

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संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद ब्रह्मपुरी स्थित श्री वशिष्ठ दूधाधारी सप्तऋषि आश्रम प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए आश्रम के श्री महंत जयरामदास महाराज ने कहाभगवान श्री हरि की भक्ति मनुष्य जीवन को न केवल सफल बनाती है, बल्कि उसे सार्थक उद्देश्य भी प्रदान करती है। जब मनुष्य ईश्वर की शरण में जाता है, तब उसका जीवन दिशाहीन नहीं रहता, बल्कि धर्म, सत्य और करुणा के मार्ग पर चलने लगता है। श्री हरि की भक्ति से मनुष्य के अंतःकरण में शुद्धता आती है और उसका मन सांसारिक विकारों से मुक्त होने लगता है। यह भक्ति उसे यह बोध कराती है कि जीवन का वास्तविक लक्ष्य केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति नहीं, बल्कि आत्मा का उत्थान और ईश्वर से तादात्म्य स्थापित करना है। इसी कारण श्री हरि की भक्ति जीवन को सफलता की पराकाष्ठा तक पहुँचा देती है।भगवान राम की भक्ति मनुष्य के जीवन को आनंद से भर देती है और उसके अस्तित्व में एक दिव्य सुगंध घोल देती है। रामभक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षण में मर्यादा, संयम और प्रेम का संचार करती है। भगवान राम के आदर्श चरित्र का स्मरण करते हुए मनुष्य स्वयं को कर्तव्यनिष्ठ, सत्यवादी और करुणामय बनाने का प्रयास करता है। उनके नाम का स्मरण हृदय में शांति उत्पन्न करता है और जीवन के कष्टों को सहन करने की शक्ति प्रदान करता है। रामभक्ति से प्राप्त आनंद बाहरी साधनों पर निर्भर नहीं होता, बल्कि भीतर से प्रकट होता है, जो कभी क्षीण नहीं होता।रामभक्ति मनुष्य के विचारों को उच्च बनाती है और उसके कर्मों को पवित्र करती है। जब जीवन में भक्ति की सुगंध बस जाती है, तब मनुष्य का व्यवहार स्वतः ही सौम्य और कल्याणकारी हो जाता है। वह दूसरों के दुःख को अपना समझने लगता है और सेवा को ही अपना धर्म मान लेता है। ऐसी भक्ति मनुष्य को अहंकार, लोभ और ईर्ष्या से दूर कर विनम्रता और प्रेम से भर देती है। जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी भक्त का विश्वास डगमगाता नहीं, क्योंकि उसे यह अनुभूति रहती है कि प्रभु राम सदैव उसके साथ हैं। श्री महंत जयराम दास महाराज ने कहा

 

अंततः भगवान श्री हरि और भगवान राम की भक्ति मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाती है। यह भक्ति न केवल इस लोक में सुख, शांति और आनंद प्रदान करती है, बल्कि परलोक में भी आत्मा के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। संसार की सभी उपलब्धियाँ समय के साथ नष्ट हो जाती हैं, किंतु भक्ति का फल शाश्वत होता है। इसी कारण कहा जाता है कि जो जीवन भगवान राम की भक्ति से सुगंधित हो जाता है, वही जीवन वास्तव में धन्य, सफल और पूर्ण माना जाता है।

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