भगवान राम का नाम ही भवसागर पार जाने वाली नैया है श्री महंत रघुवीर दास महाराज

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संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद पवित्र धरा और विशेषकर श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े का वातावरण सदैव ही भक्ति और अध्यात्म से सराबोर रहता है। श्री महंत गुरु भगवान रघुवीर दास महाराज के मुखारविंद से निकली ज्ञान की अमृत वर्षा वास्तव में साधकों श्रद्धालु भक्तजनोंके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। भगवान राम की भक्ति को ‘भवसागर से पार उतारने वाली नैया बताते हुए श्री महंत रघुवीर सिंह महाराज ने कहा क्योंकि तुलसीदास जी ने भी कहा है: “राम भगति जनु कल्पतरु, समन सकल भव सूल।” गुरुदेव के इस दिव्य संदेश के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार प्रतीत होते हैं: आध्यात्मिक सार: भक्ति का मार्ग अमृत वर्षा का प्रभाव: श्री महंत रघुवीर दास महाराज का सानिध्य और उनके वचन हृदय के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। भवसागर से मुक्ति: सांसारिक मोह-माया के इस कठिन सागर को केवल राम नाम के सहारे ही पार किया जा सकता है।

 

आश्रम की महिमा: श्री सुदर्शन आश्रम जैसे पवित्र स्थान पर सत्संग का लाभ मिलना पूर्व जन्मों के पुण्यों का फल है। गुरु और गोविंद का मेल

भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान गोविंद से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि गुरु ही वह माध्यम हैं जो हमें भगवान राम की भक्ति के सही मार्ग पर प्रशस्त करते हैं। प्रातः स्मरणीय श्री महंत जी का मार्गदर्शन भक्तों के जीवन में अनुशासन, सेवा और समर्पण का संचार करता है।

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