16 August 2026

एक लोटा जल और बेलपत्र चढ़ाने मात्र से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं महंत श्यामसुंदर महाराज

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संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार श्यामपुर स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम के परमाध्यक्ष श्री महंत श्यामसुंदर महाराज ने शिवरात्रि महापर्व की महिमा का वर्णन करते हुए कहासृष्टि के कण-कण में रचे-बसे महादेव शिव का स्वरूप अत्यंत निराला और अलौकिक है क्योंकि वे एकमात्र ऐसे देव हैं जो आडंबरों से कोसों दूर केवल भाव के भूखे हैं। शास्त्रों में उन्हें आशुतोष कहा गया है जिसका सीधा अर्थ है कि जो बहुत जल्दी और सूक्ष्म प्रयास से भी तृप्त हो जाएं। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए किसी विशेष अनुष्ठान या स्वर्ण आभूषणों की आवश्यकता नहीं होती बल्कि एक लोटा जल, अटूट श्रद्धा और बेलपत्र का अर्पण भी उन्हें इतना भावविभोर कर देता है कि वे भक्त को वह सब कुछ प्रदान कर देते हैं जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होती है। उनके व्यक्तित्व की यह सहजता ही उन्हें ‘भोलेनाथ’ बनाती है। जब कोई भक्त सच्चे मन से शिव की शरण में आता है तो उसे केवल महादेव का ही नहीं बल्कि संपूर्ण शिव परिवार का आशीर्वाद स्वतः ही प्राप्त होने लगता है। जगत जननी माता पार्वती उस भक्त पर अपनी ममता की वर्षा करती हैं और उसे जीवन में शक्ति, धैर्य और ऐश्वर्य का वरदान देती हैं। श्री महंत श्यामसुंदर महाराज ने कहा वहीं प्रथम पूज्य गणपति गणेश, जो स्वयं बुद्धि और विवेक के अधिष्ठाता हैं, भोलेनाथ के भक्तों के मार्ग में आने वाले समस्त विघ्न-बाधाओं को जड़ से समाप्त कर देते हैं। गणपति की कृपा से भक्त को न केवल मनोवांछित फल मिलता है बल्कि उसे उस सुख को भोगने का विवेक भी प्राप्त होता है। भगवान शिव की आराधना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे किसी के दोष नहीं देखते। जिस प्रकार उन्होंने हलाहल विष पीकर सृष्टि की रक्षा की और उसे अपने कंठ में धारण कर ‘नीलकंठ’ कहलाए, उसी प्रकार वे अपने भक्तों के पापों और दुखों का शमन कर उन्हें संसार की मोह-माया से ऊपर उठाते हैं। उनकी जटाओं में गंगा की पवित्रता है, मस्तक पर चंद्रमा की शीतलता है और तीसरे नेत्र में अज्ञान को भस्म करने वाली प्रचंड अग्नि है, फिर भी वे अपने भक्तों के लिए परम शांत और सौम्य हैं। सिद्धिविनायक गणेश जी भी महादेव की भक्ति करने वालों पर अपनी विशेष दृष्टि रखते हैं क्योंकि पिता की सेवा करने वाले पुत्र को सर्वदा प्रिय होते हैं। शिव की भक्ति में लीन व्यक्ति को कभी एकाकीपन का आभास नहीं होता क्योंकि माता पार्वती की करुणा उसे हर पल घेरे रहती है। शिव परिवार की यह संयुक्त कृपा भक्त के जीवन को ऋद्धि-सिद्धि और आध्यात्मिक शांति से सराबोर कर देती है। संसार में शिव ही एक ऐसे उदार दाता हैं जिन्होंने असुरों से लेकर देवताओं तक और पशु-पक्षियों से लेकर मनुष्यों तक, सबको उनकी पात्रता से बढ़कर फल दिया है। उनकी सूक्ष्म आराधना भक्त के अंतःकरण को शुद्ध करती है और अंततः उसे उस परम आनंद से जोड़ देती है जो शाश्वत और अविनाशी है।

 

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