हरिद्वार गुरु-स्मृति में विशाल संत भंडारे का आयोजन, संतों ने बताया गुरु-सान्निध्य के महत्व
प्रमोद कुमार
हरिद्वार कनखल स्थित प्रसिद्ध श्री गुरु निवस, मन्दिर निकट पंजाब सिंध क्षेत्र में प्रातःस्मरणीय गुरु भगवान स्वामी छत्रपति दास जी महाराज तथा अन्य पूज्य गुरुजनों की पावन स्मृति में विशाल संत भंडारे का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महात्माओं एवं श्रद्धालु भक्तों ने उपस्थित होकर गुरुचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर आश्रम के श्रीमहंत देवानंद महाराज ने कहा कि गुरु का सान्निध्य मनुष्य को बड़े ही पुण्यों और सौभाग्य से प्राप्त होता है। गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं होते, बल्कि वे जीवन के अंधकार को दूर कर सत्य, धर्म और भक्ति का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु के सान्निध्य में रहकर मनुष्य अपने जीवन को श्रेष्ठ, पवित्र और कल्याणकारी बना सकता है। गुरु ही जीव को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं।
 
वहीं संत समाज के पूज्य महंत विनोद महाराज ने अपने प्रेरणादायक विचारों में कहा कि गुरु का स्मरण ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है। गुरु की कृपा से ही मनुष्य के भीतर भक्ति, विनम्रता, सेवा और सदाचार के भाव जागृत होते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति जीवन में कभी भटकता नहीं, बल्कि सत्य और धर्म के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ता है। संत भंडारे के उपरांत संत-महात्माओं ने गुरु महिमा का गुणगान किया और समस्त मानव समाज के कल्याण की मंगलकामना की। वातावरण गुरु भक्ति, सत्संग और श्रद्धा से ओतप्रोत हो उठा।

