संत समागम एवं संत भंडारे में गूंजी गुरु महिमा संत महापुरुषों ने भक्तों के बीच कहे कल्याणकारी वचन
प्रमोद कुमार
हरिद्वार भूपतवाला स्थित मुखिया गली में स्थित सतगुरु ईश्वर कृपा धर्म कुटी में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान की पावन पुण्य स्मृति में विशाल संत समागम एवं संत भंडारे का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर दूर-दूर से संत-महात्माओं तथा श्रद्धालु भक्तों ने उपस्थित होकर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की तथा गुरु महिमा का गुणगान किया।कार्यक्रम के दौरान संतों ने गुरु की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही मनुष्य जीवन के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। गुरु का सान्निध्य मनुष्य को सत्य, धर्म और मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है। गुरु कृपा के बिना जीवन की वास्तविक सार्थकता संभव नहीं है।
 
इस अवसर पर परम पूज्य महंत श्री मक्कन सिंह जी महाराज ने अपने श्रीमुख से गुरु महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु का स्थान इस संसार में सर्वोच्च है। गुरु ही जीव को ईश्वर से जोड़ने का माध्यम बनते हैं और उनके उपदेश जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं।
महंत संत अमरीक सिंह जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी वचनों में गुरु तथा भगवान की अनंत महिमा का सुंदर वर्णन करते हुए कहा कि गुरु की शरण में जाने वाला व्यक्ति जीवन के सभी कष्टों से पार होकर आत्मिक शांति को प्राप्त करता है। गुरु भक्ति ही मानव जीवन की सबसे बड़ी निधि है।
महंत श्री इंद्रदास जी महाराज ने अपने पावन विचारों में कहा कि गुरु केवल ज्ञानदाता ही नहीं, बल्कि जीवन के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं। उनके बताए मार्ग पर चलकर मनुष्य अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है।
श्री सतपाल जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु का स्मरण और उनकी सेवा मनुष्य को ईश्वर की कृपा का पात्र बनाती है। गुरु की महिमा शब्दों में वर्णित नहीं की जा सकती, वह अनुभव का विषय है।महंत श्री रविदेव जी महाराज ने अपने पावन उद्बोधन में कहा कि गुरु कृपा से ही मनुष्य के भीतर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है। गुरु का जीवन ही समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत होता है।
समापन पर विशाल संत भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सभी संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और गुरु महिमा के जयघोष से भक्तिमय बना रहा। इस अवसर पर कोठारी महंत राघवेंद्र दास महाराज महंत रवि देव महाराज महामंडलेश्वर राम मुनि महाराज महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज मंडलेश्वर श्याम दास महाराज महंत दिनेश दास महाराज स्वामी रविंदर दास महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे

