ब्रह्मलीन परम पूज्य 1008 स्वामी श्री हर्षवर्धन जी महाराज की पावन स्मृति में श्रद्धांजलि सभा, षोड़शी भंडारा एवं विशाल संत समागम का भव्य के साथ संपन्न हुआ

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हरिद्वार। कनखल स्थित कपिल वाटिका में ब्रह्मलीन परम पूज्य 1008 स्वामी श्री हर्षवर्धन जी महाराज की पावन स्मृति में श्रद्धांजलि सभा, षोड़शी भंडारा एवं विशाल संत समागम का भव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हरिद्वार के विभिन्न मठों, मंदिरों एवं अखाड़ों से पधारे संत-महापुरुषों ने ब्रह्मलीन संत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आध्यात्मिक योगदान को अविस्मरणीय बताया। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर स्थित श्री विशुद्ध महादेव श्रृंगेश्वर धाम से पधारे परम पूज्य महंत प्रभाकर जी महाराज (ऋषिकेश) की तिलक-चादर विधि वैदिक मंत्रोच्चार एवं संतों के आशीर्वाद के मध्य विधिवत संपन्न हुई। संपूर्ण वातावरण भक्ति, श्रद्धा एवं तलि एवं घोडशी भंडारा सनातन परंपरा की दिव्यता से आलोकित हो उठा। कार्यक्रम का संचालन महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री हरि चेतनानंद जी महाराज ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संतों का जीवन समाज को धर्म, सेवा, त्याग और मानवता का मार्ग दिखाने के लिए समर्पित होता है। ब्रह्मलीन स्वामी हर्षवर्धन जी महाराज का संपूर्ण जीवन सनातन संस्कृति के संरक्षण, धर्म जागरण और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा, जिसकी प्रेरणा सदैव

 

 

समाज को मिलती रहेगी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष तथा पंचायती श्री महानिर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत रविंद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि सच्चे संत कभी शरीर से विदा नहीं होते, बल्कि अपने आदर्शों, उपदेशों और तपस्या के माध्यम से सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं। संत परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है। महंत रघुवीर दास महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु का सान्निध्य मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। गुरु ही जीव को ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं तथा धर्म, सेवा और सदाचार का वास्तविक अर्थ समझाते हैं। महंत कमलेशानंद सरस्वती ने कहा कि भक्ति, सेवा और सत्संग ही जीवन की वास्तविक पूंजी हैं। संतों के चरणों में बैठकर प्राप्त होने वाला ज्ञान मानव जीवन को सार्थक बनाता है तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है। श्रद्धांजलि राभा के उपरांत विशाल षोड़शी भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर ब्रह्मलीन स्वामी हर्षवर्धन जी महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन किया। संपूर्ण आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक गरिमा का अनुपम उदाहरण बना।

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