त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति हैं स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ-श्रीमहंत रविंद्रपुरी
समारोह पूर्वक मनाया गया स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ का अवतरण दिवस
स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ का सेवा कार्यो में महत्वपूर्ण योगदान-आचार्य बालकृष्ण
 
हरिद्वार, 2 सितम्बर। भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज का 73वां अवतरण दिवस सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूषों के सानिध्य में समारोह पूर्वक मनाया गया। रानीपुर झाल स्थित उत्तराखंड संस्कृत अकादमी में आयोजित अवतरण दिवस समारोह में संतो और श्रद्धालुओं ने स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज पर पुष्प्वर्षा कर शुभकामनाएं दी। इस दौरान 73 किलो के लड्डू का भोग लगाया गया। जिसे श्रद्धालु और भक्तों को वितरित किया गया। अवतरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार के साथ सेवा कार्यो में भी महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ की उनके गुरू के प्रति श्रद्धा और विश्वास से युवा संतों को प्रेरणा लेनी चाहिए। सभी संत महापुरूषों और अतिथीयों का आभार व्यक्त करते हुए स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि राष्ट्र की एकता अखंडता बनाए रखने में संत महापुरूषों की अहम भूमिका है और युवा संत राष्ट्र की धरोहर हैं। युवा संतों को गुरूजनों के सानिध्य में प्राप्त ज्ञान से समाज को आलोकित करना चाहिए। पूर्व मंत्री डा.हरक सिंह रावत ने कहा कि संत महापुरूष समाज के प्रेरणास्रोत हैं। सभी को स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज के त्यागमयी जीवन से प्रेरणा लेते हुए मानव सेवा में योगदान का संकल्प लेना चाहिए। भूमा निकेतन के प्रबंधक राजेंद्र शर्मा और ट्रस्टियों ने सभी संतों और अतिथीयों का स्वागत किया। प्रसार भारती के चेयरमैन नवनीत सहगल, महानिर्वाण अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी, महामंडलेश्वर स्वामी शंकर करौली महाराज, अनिरूद्ध भाटी सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष और श्रद्धालु शामिल रहे।



