श्री पंच दशनाम आह्वान अखाड़े मेश्री महंत ब्रह्मलीन शंकर भारती जी महाराज की तीसरी पावन पुण्यतिथि बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाई गई

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प्रमोद कुमार हरिद्वार

मनोज ठाकुर,हरिद्वार 15 जून 2024 को श्री पंच दशनाम आह्वान अखाड़े मेश्री महंत ब्रह्मलीन शंकर भारती जी महाराज की तीसरी पावन पुण्यतिथि श्री महंत थाना पति जय भारती जी महाराज के पावन सानिध्य में बड़े ही धूमधाम हर्षो उल्लास के साथ संत महापुरुषों की गरिमा मय उपस्थिति में मनाई गई इस अवसर पर बोलते हुए श्री पंच दशनाम आह्वान अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री महंत स्वामी चेतनानंद गिरी जी महाराज ने कहा जिन भक्तों और शिष्यों को गुरु का सानिध्य प्राप्त होता है वह लोग बड़े ही भाग्यशाली होते हैं गुरु की कृपा ही भक्त और शिष्य को तेजस्वी और तपस्वी बनती है इस संसार में गुरु की महिमा बड़ी ही अपरम्पार है इस पृथ्वी लोक पर गुरु ही ईश्वर के प्रतिनिधि हैं गुरु ही भक्तों को उंगली पड़कर भव सागर पार करते हैं गुरु के श्री मुख से निकला एक-एक वचन सत्य होता है जो भक्त गुरु की महिमा और गुरु के वचनों को ध्यान में रखकर चलता है उसका सदैव ही कल्याण होता है इस पृथ्वी लोक पर गुरु जनों का कोई सानी नहीं संत इस पृथ्वी लोक पर चलते फिरते तीर्थ के सामान है तीर्थ स्थलों के दर्शन हेतु आपको स्वयं चलकर जाना पड़ता है किंतु गुरुजनों की कृपा से आपको कहीं पर भी कभी भी संत के रूप में एक तीर्थ के दर्शन हो सकते हैं संत के दर्शन आपके जीवन में शुभता का संकेत प्रदान करते हैं इस अवसर पर बोलते हुए श्री पंचदस नाम आह्वान अखाड़े के उत्तराखंड श्री महंत गोपाल गिरी जी महाराज ने कहा मठ मंदिर आश्रम अखाड़ो से होने वाला शंखनाद संपूर्ण विश्व में सनातन संस्कृति के रूप में गूंजता है इस संसार में भगवान द्वारा तथा उनके आदर्शों द्वारा स्थापित की गई सनातन परंपरा ही विश्व की सबसे मजबूत परंपरा है गुरु साक्षात भव्यता और दिव्यता की मूर्ति होते हैं वह गंगा के सामान पावन होते हैं गुरु ही धर्म कर्म के माध्यम से भक्तों को कल्याण की ओर ले जाते हैं इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत थानापति जय भारती जी महाराज ने कहा परम पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी श्री शंकर भारती जी महाराज ज्ञान त्याग तपोबल की एक अखंड मूर्ति थे उनके ज्ञान का प्रताप आज भी भक्तजनों शिष्यों पर आश्रम के बीच विद्यमान है गुरु की महिमा इस संसार में बड़ी ही अपरम्पार है गुरु मिलते हैं ईश्वर से गुरु ही देते ज्ञान भव सागर की नैया के गुरु ही तारणहार मेरे परम पूज्य गुरुदेव त्याग मूर्ति तपो निधि श्री महंत श्री शंकर भारती जी महाराज साक्षात ईश्वर की प्रतिमूर्ति थे उन्होंने अपने ज्ञान और तपोबल से भक्तों के कष्ट हरे उन्हें सत्य की राह दिखाई धर्म-कर्म के माध्यम से उनके जीवन को कल्याण की ओर अग्रसर किया परम पूज्य गुरुदेव ज्ञान का एक विशाल सूर्य थे मैं आज उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर अपने परम पूज्य गुरुदेव के श्री चरणों में बारंबार नमन करता हूं बारंबार नमन करता हूं इस अवसर पर सभापति श्री महंत गोपाल गिरि महाराज सचिव श्री महंत गीत गिरी महाराज श्रीमहंत थानापति जय भारती जी महाराज श्री महंत थाना पति केशव पुरी महाराज श्री महंत कौशलपुरी महाराज श्री महंत मधुगिरी महाराज श्री महंत सुंदरपुरी महाराज श्री महंत राम गिरि महाराज श्री थानापति श्री महतं मंगल गिरी महाराज श्री महंत सोम गिरी महाराज श्री महंत अशोक गिरी महाराज श्री महंत कुलदीप गिरी महाराज थानापति महंत जय भारती थानापति गुलाब भारती महाराज सहित भारी संख्या में संत महंत महामंडलेश्वर तथा भक्तगण उपस्थित थे सोंगरी जिला कैथल से पधारे थाना पति श्री जय भारती जी महाराज ने अपने गुरु की तृतीय पावन स्मृति में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया उपस्थित सभी संत महापुरुषों ने श्री महंत शंकर भारती जी महाराज को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए

 

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