30 August 2025

देश की एकता,अखंडता को कायम रखने में संत महापुरुषों की अहम भूमिका रही हैं – संत त्रिलोचन दास

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सम्पादक प्रमोद कुमार

 

 

वरिष्ठ पत्रकार राकेश वालिया,लोनी, सचखंड नानक धाम, इंद्रपुरी, लोनी मे दास धर्म के प्रमुख संत त्रिलोचन दास महाराज की अध्यक्षता मे एक विराट दास धर्म संत समागम का आयोजन किया गया। जिसमे देश विदेश से आये संत महापुरुषों और श्रद्धांलुओं ने दास धर्म संत समागम की दिव्यता और भव्यता कों बढ़ाया। समागम मे आये संत महापुरुषों ने अपने विचारों से समागम मे देश की एकता और अखंडता कों बनाये रखने कों लेकर पुरे विश्व कों संदेश दिये। इस अवसर पर दास धाम समागम में पहुंचे संत महापुरुषों का फूल मलाये पहनकर स्वागत सम्मान किया गया।

संत त्रिलोचन दास जी महाराज ने कहा की देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए अपने उपदेशों और कार्यों के माध्यम से समाज को जागरूक करने के लिए हम कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा की हमारा उद्देश्य केवल धार्मिक सुधार नहीं हैं , बल्कि समाज में समरसता और भाईचारे का माहौल बनाना ही हमारा उद्देश्य हैं।उन्होंने कहा की हम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते है कि वक्फ बोर्ड कों तत्काल समाप्त कर दिया जाये। और संत महापुरुषों द्वारा द्वारा बनाए जा रहे सनातन बोर्ड प्राथमिकता के साथ गठन कर इसे लागू किया जाए। और इसमें संतों की अहम भूमिका और भागीदारी रहनी चाहिए जिससे सनातन धर्म की रक्षा की जा सके।

श्री महंत नारायण गिरि महाराज, (अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, जूना अखाडा) ने कहा कि सचखंड नानक धाम के संरक्षक एवं प्रमुख संत त्रिलोचन दास द्वारा दी गई उनकी शिक्षाएं एकता, प्रेम और शांति पर आधारित हैं। उन्होंने कहा की वे धर्म, जाति और संप्रदाय के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की बात करते हैं। उन्होंने कहा की संत त्रिलोचन दास ने लोगों को परस्पर सहयोग और भाईचारे का महत्व समझाया हैं , जिससे समाज में सामूहिक एकता को बढ़ावा मिला हैं ।उन्होंने कहा की उनके उपदेशों में यह संदेश देखने कों मिलता हैं कि समाज की असल शक्ति उसकी एकता में है, और इस एकता को बनाए रखने के लिए हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।उन्होंने कहा की उनका यह योगदान आज हमारे सनातन धर्म में प्रेरणा का स्रोत है।

निर्मल अखाड़े के परमध्यक्ष श्री महंत ज्ञान देव सिंह शास्त्री ने कहा की संत महापुरुष सनातन धर्म के सच्चे हितेषी होते हैं क्योंकि वे न केवल धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हैं, बल्कि समाज को इन सिद्धांतों के सही अर्थ और महत्व को भी समझाते हैं।उन्होंने कहा की संत महापुरुषों का उद्देश्य सिर्फ व्यक्तिगत मोक्ष प्राप्ति नहीं होता, बल्कि वे समाज की भलाई और मानवता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। वे सच्चे सनातन धर्म के मार्गदर्शक होते हैं, जो धर्म के शाश्वत और सत्य सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाते हैं।

 

कथा व्यास स्वामी अर्पित महाराज ने कहा कि संत महापुरुषों द्वारा दी गईं शिक्षाओं से यह सिद्ध होता है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे जीवन के रूप में व्यक्त होता है, जिसमें सत्य, अहिंसा, प्रेम और सेवा की भावना सर्वोपरि होती है। क्योंकि संत त्रिलोचन दास जी महाराज जिस तरह से अपने सेवा भाव से और अपने वचनों से देश में एकता और अखंडता की अलख जाग रहे हैं वह अपने आप में एक चमत्कार से काम नहीं है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से श्री जगतगुरु आचार्य अरुण चैतन्यपुरी, बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर (अयोध्या लंगर वाले), स्वामी भूपेंद्र गिरी, आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर महाराज, भागवत आचार्य संजीव कृष्ण ठाकुर (वृंदावन), जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी राम दिनेशाचार्य जी महाराज, महामंडलेश्वर बाल साध्वी पुष्पांजलि पुरी, संत बाबा रणजीत सिंह, आध्यात्मिक गुरु महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद, तन्मय वशिष्ठ, आचार्य विवेक मुनि, स्वामी योग भूषण महाराज, श्री महंत स्वामी ज्ञान देव सिंह, दीपक दास, हेरि दास, श्री राम अहूजा आदि के संग अनेक संत महापुरुष और श्रद्धालु मौजूद रहे।

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