इन्सान का हृदय किसी मंदिर से कम नहीं होता श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार 4 मई 2025 (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द) हरिद्वार श्यामपुर स्थित प्रसिद्ध श्री श्याम वैकुण्ठ धाम में भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज ने कहा जिसके हृदय में भक्ति का वास हो गया हो उसके हृदय में स्वयं भगवान विराजमान हो जाते हैं कलयुग में की गई सूक्ष्म आराधना से भी मनुष्य को भगवान का अनुभूति रूप में वर्ण होगा ईश्वर की उसे पर विशेष कृपा बनी रहेगी उसे पुनीत फलों की प्राप्ति होगी वह जो देखना चाहता है सिर्फ उसे वही दिखाई देते हैं क्योंकि उसका मन भक्ति के अधीन है और भक्ति के प्रताप से उसे वही दिखाई देगा जो वह देखना चाहता है जिसके मन मस्तिष्क और हृदय में जब भगवान विराजमान है तो उसे मन की आंखों से हर रूप में हर स्वरूप में हर जीव में ईश्वर के दर्शन होंगे क्योंकि वह अपने मन से अपने हृदय से विकारों को मिटाकर उसमें भगवान का वास कर चुका है इसीलिये कहते हैं जैसा पिया पानी वैसी हो गई वाणी और जैसा खाया अन्न वैसा हो गया मन शुद्ध आहार और शुद्ध विचारों का होना आवश्यक है विचारों में लचीलापन मन को भटका सकता है ईश्वर की कृपा सभी पर एक समान होती है उन्होंने सभी को विवेक दिया है चाहे उसे विवेक का सही उपयोग करो या इस विवेक के माध्यम से अपने विनाश का मार्ग चुनो या कल्याण का मार्ग चुनो यह मनुष्य पर निर्भर है।