31 August 2025

हिंदुस्तानी मर्यादित वस्त्र पहनकर ही हिंदू धर्म स्थलों में प्रवेश की अनुमति होनी चाहिये ठाकुर मनोजानन्द

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सम्पादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार 6 मई 2025( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द) वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानन्द ने हरिद्वार में बने समस्त हिंदू धर्म स्थल मठ मंदिर आश्रम कुटिया गुरुद्वारों आदि से विनम्र प्रार्थना की है कि अपनी पावन गुरुजनों की महापुरुषों की तथा ईश्वर की आराधना के केंद्र मठ मंदिर आश्रम अखाड़े है जहां से संपूर्ण विश्व आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ सनातन का महत्व समझता है हमारे हिंदू मठ मंदिर आश्रमों में अक्सर देखने के लिए मिलता है जब भी कोई पुण्यतिथि होती है वार्षिक अधिवेशन होता है सालाना भंडारा होता है या किसी भी प्रकार का उत्सव होता है तो कुछ लोग अमर्यादित वस्त्र पहनकर मठ मंदिर आश्रम तथा अखाड़े में यज्ञ अनुष्ठान भंडारे में अन्य कार्य कर्मों में प्रवेश कर जाते हैं कोई भी महिला अगर पेट या अन्य अंग प्रदर्शित होने वाले वस्त्र पहनकर हिंदू स्थल में प्रवेश करना चाहे तो उसे पर रोक लगनी चाहिये हिंदुस्तानी पहनावा साड़ी या सूट पहनने पर ही उन्हें प्रवेश की अनुमति मिलनी चाहिये साथ ही पुरुषों पर भी कड़े नियम लागू करने चाहिये जब किसी धार्मिक अनुष्ठान यज्ञ भंडारे में जाये तो कुर्ता पजामा कुर्ता धोती पहन कर ही जाये साथ ही स्नान करने के बाद मर्यादित तिलक लगा होना चाहिये पूजा अनुष्ठान के दौरान कोई भी महिला चाहे कितनी भी प्रभावशाली हो भक्त हो या समाजसेवी हो या पत्रकार हो नेता हो या कोई अधिकारी कोई भी पुरुष अमर्यादित वस्त्र पहनकर मंदिर मठ आश्रम अखाड़े तथा धर्मस्थलों में व यज्ञ अनुष्ठान भंडारे यदि में प्रवेश न कर पाये भंडारण गृह व रसोई के आसपास कोई दूसरे धर्म का व्यक्ति न जा पाये सभी धर्मस्थलों को इस पर ठोस निर्णय लेना चाहिये किसी भी धार्मिक अनुष्ठान भंडारे यज्ञ आदि में अमर्यादित वस्त्र पूरी तरह प्रतिबंधित होने चाहिये कोई भी चमड़े के जूते चमड़े की बेल्ट या फीते वाले जूते पैंट शर्ट कार्यक्रम के दौरान पहनकर प्रवेश न कर पाये ऐसे निर्णय हमारी सनातन संस्कृति को और अधिक मजबूत कर सकते हैं संतो तथा ब्राह्मणों के अलावा अन्य किसी को भी आश्रम मठ मंदिर आदि से दक्षिण स्वरूप कुछ नहीं दिया जाना चाहिये भंडारों में पत्रकारों की दक्षिणा भी बंद की जानी चाहिये उन्हें सम्मान स्वरूप उपहार या सम्मान दें और जो कुछ पत्रकारिता की आड़ में खानाबदोश लोग पत्रकार बनकर आश्रमों में घुस जाते हैं उन पर लगाम लगनी चाहिये और यह भी देखा जाना चाहिये की जो इन्हें पैसा दक्षिण के रूप में दिया गया था उसका नशे या अन्य किसी गलत कार्य के लियें तो नहीं कर रहे किंतु साथ ही यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए की किसी भी वास्तविक पत्रकार की भावना किसी भी तरह से इस दौरान आहत न हो पाये इसलिए सिर्फ आमंत्रित पत्रकार ही कार्यकर्मों में प्रवेश कर सके बाकी सभी को प्रवेश की अनुमति सोच विचार कर देनी चाहिये धर्म के प्रति हमारी आस्था को संपूर्ण विश्व में मिसाल के तौर पर पेश कर सकते हैं यह निर्णय संपूर्ण विश्व के लियें विश्व प्रसिद्ध पावन नगरी हरिद्वार की धरा से मर्यादित संदेश हो सकता है कि हम अपने आचार विचार और संस्कृति के संरक्षण लिये थोड़े कठोर भी हो सकते हैं।

 

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