तन का काला ईश्वर की कृपा से अपनी प्रतिभा को निखार सकता है किंतु मन का काला खुद तो डूबता ही है दूसरों को भी ले डूबता है महामंडलेश्वर संजय गिरी महाराज

सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार कांगड़ी स्थित सदगुरुदेव आश्रम में भक्तजनों के बीच ज्ञान की अमृत वर्षा करते हुए जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर परम पूज्य संजय गिरी महाराज महाराज ने कहा ब्रह्मा विष्णु महेश द्वारा रचित इस संसार में सभी मनुष्यों को ईश्वर ने एक जैसा बनाया है किंतु अपनी बुद्धि मता शिक्षा तथा गुरुजनों द्वारा प्रदत्त ज्ञान के आधार पर मनुष्य ने अपनी बुद्धि का विकास कर अपनी यथा क्षमता के अनुसार विकास किया है किंतु उस परमात्मा ने सभी को एक सामान बनाया है कोई बाहर से से सुंदर है और मन का काला है और कोई मन से सुंदर है सिर्फ काया से काला है इंसान का रूप से सुंदर होना इतना आवश्यक नहीं जितना अंदर से और मन मस्तिष्क से सुंदर होने की आवश्यकता है अच्छे विचारों की आवश्यकता है जो आसुरी प्रवृत्ति के लोग हैं वे तन से सुंदर हो सकते हैं किंतु उनकी परवर्ती दुष्ट के समान होती है और उनके कार्य भी राक्षसी असुर दुष्ट प्रवृत्ति के हो सकते हैं किंतु जिन पर राम की कृपा होती है वह भले ही रूप के काले हो किंतु मन के अच्छे हो सकते हैं यह परवर्ती काले और गोरे दोनों लोगों में हो सकती है किंतु जिसकी अंतरात्मा और मन सुंदर है वह सुंदर ही सुंदर है जिस प्रकार भगवान राम का नाम मात्र तीन अक्षरों से बना है किंतु इसमें त्रिलोक समाया है नाम सिर्फ तीन अक्षर का है किंतु इसकी महिमा तीनों लोकों को पार कर सीधे भवसागर पार तक जाती है इसलिये आओ हम सब मिलकर राम नाम की महिमा का रसपान करें राम ही सूरत राम ही मूरत राम करे उध्दार रे राम संपूर्ण शकल संसार भगवान राम इस संसार के कण-कण में व्याप्त है सुख में भी राम और दुख में भी राम सुख में वह हमें आनंद का बोध कराते हैं और दुख में हमारी पीड़ा सहन करने की क्षमता बन जाते तुझ में भी राम मुझ में भी राम आप कहां ढूंढ रहे हो भगवान राम को भगवान राम तो इस सृष्टि के कण-कण में है आपका हृदय में बैठे हुए हैं।