वैदिक विमान शास्त्र का वर्तमान समय में प्रयोग श्रेष्ठकर साबित हो सकता है : वैधशिरोमामणि धीरज शर्मा

हरिद्वार 16 अगस्त 2023 को देवपुरा स्थित सीएम कोर्ट परिसर में पहुंचे पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान हरिद्वार में अध्यनरत बी. ए. एम. एस स्कॉलर के विद्यार्थी धीरज शर्मा सुपुत्र पंडित श्री सुभाष शर्मा ने वेदों एवम वेदों के सर्वेकार्यरत सिद्धांतो को आधार मानकर यह बताया है कि यदि हम वर्तमान समय में हमारे वेद में वर्णित विमान विद्या एवं विमान निर्माण विद्या का प्रयोग करें तो यह देश ही नहीं अपितु पूरे विश्व के लिए सिद्ध कर साबित होगा क्योंकि हमारे वैदिक शास्त्रों में विमान का बहुत ही उन्नतिय रुप से वर्णन किया गया है और विमान के समस्त कार्यकारी सिद्धांतो का भी उल्लेख किया गया है यहां तक कि हमारे वैदिक शास्त्रों में विमान में काम आने वाले सभी यंत्रों का और विमान गमन की सभी विधियों का एवं विमान की समस्त गतिविधियों का सविस्तार सहित वर्णन किया गया है जिसका वर्तमान में प्रयोग करने से यह हम सबके लिए परिणामकर एवं श्रेष्ठकर साबित हो सकता है वैदिक शास्त्रों में विमान निर्माण विधि के साथ ही विमान इंधन निर्माण विधि का भी वर्णन किया गया है जो कि वर्तमान समय के लिए बेहद उपयोगी है हमारे वैदिक विमान आधुनिक विमान की तुलना में कई गुणा उन्नत एवं शक्तिशाली विमान है जो कि अंतरिक्ष समुंद्र एवं भूमि तीनों स्थानों पर गमन करते हैं ऐसे विमानों को शास्त्रों में त्रिपुर विमान कहा जाता है अर्थात जो तीनो जगह गगन भूमि समुंद्र में गतिमान होते हो यह त्रिपुर विमान सामान्य विमान की तुलना में कई गुना अधिक दक्षवान एवं शक्तिशाली होते हैं यह त्रिपुर विमान वैदिक मतानुसार 2600 कक्ष्यगति से भी अधिक गति शक्ति प्रकट करते हैं एवं इनका वेग सामान्य विमान की तुलना में हजार गुना अधिक होते हैं ऐसे त्रिपुर विमानों का वर्तमान समय में पूर्णतया अभाव है यदि वैदिक विमान शास्त्र को आधार मानकर तीनों स्थानों ( भूमि गगन समुंद्र ) पर गतिमान विमानों का वर्तमान समय में निर्माण किया जाए तो यकीन मानिए भारत की सुरक्षा प्रणाली और भारत की विमान प्रणाली अतिशीघ्र सर्वोच्च पद को प्राप्त करेगी जिससे कि हमारा भारत है पुनः विश्व गुरु के रुप में पहचाना जाएगा क्योंकि हमारे वैदिक शास्त्रों में ऐसी दिव्य कल्याणकारी विद्याओं का वर्णन किया गया है जिसका वर्तमान समय में पूर्णतया अभाव है यदि हम इन सभी दिव्य एवं कल्याणकारी विद्याओ का वर्तमान समय में अनुसरण करते हैं तो देश का विकास एवं प्राधोगिकी मैं सर्वाधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं जिससे की भारत समस्त विद्याओ की आधारशिला कहलाएगा।