एकांतवास और अकेलापन सुनने में एक ही लगता है किंतु फर्क जमीन और आसमान का होता है :- पूज्य श्री संजय गिरी जी महाराज

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मनोज ठाकुर,हरिद्वार श्री प्रेम गिरी वानखंडी धाम कांगड़ी में अपने श्री मुख से भक्तजनों के बीच उदगार व्यक्त करते हुए जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर 1008 परम पूज्य श्री संजय गिरी जी महाराज ने कहा एकांतवास और अकेलापन सुनने में एक जैसा लगता है किंतु इन दोनों अक्षरों में फर्क जमीन और आसमान का अकेलापन मनुष्य को अंदर ही अंदर खा जाता है और उसे दिन प्रतिदिन मायूसी तथा मौत की और धकेलता है किंतु एकांतवास मनुष्य को अपने मस्तिष्क को एकाग्र करने का अवसर प्रदान करता है साथ ही एकांतवास अपने मन में चल रहे विचारों पर मनन करने का चिंतन करने का अवसर प्रदान करता है तथा भगवान श्री हरि के चरणों की ओर ध्यान लगाने का अपने ज्ञान को केंद्रित करने का अवसर प्रदान करता है।
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