संत समाज ने किया साकेतवासी महामंडलेश्वर स्वामी नारायण दास महाराज को नमन

हरिद्वार, 9 दिसम्बर। साकेतवासी महामंडलेश्वर स्वामी नारायण दास महाराज की पैंतीसवीं पुण्य तिथी सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूषों के सानिध्य में समारोह पूर्वक मनायी गयी। श्रवणनाथ नगर स्थित नृसिंह धाम पीठ में जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य महाराज के संयोजन में आयोजित पुण्यतिथी समारोह में संतों व श्रद्धालुओं ने साकेतवासी महामंडलेश्वर स्वामी नारायण दास महाराज के दिखाए मार्ग पर चलने और उनकी शिक्षाओं का पालन करते हुए धर्म, अध्यात्म व समाज की सेवा करने का संकल्प लिया। समारोह को संबोधित करते हुए जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य महाराज ने कहा कि गुरू ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं। वे सौभाग्यशाली है कि उन्हें गुरू के रूप में धर्म शास्त्रों के परम विद्वान महामंडलेश्वर स्वामी नारायण दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। पूज्य गुरूदेव से प्राप्त ज्ञान और शिक्षाओं का अनुसरण एवं संत परंपरांओं का पालन करते हुए आश्रम की सेवा परंपरा को आगे बढ़ाना ही उनका लक्ष्य है। श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के पूर्व अध्यक्ष महंत विष्णुदास महाराज ने कहा कि साकेतवासी महामंडलेश्वर नारायण दास महाराज त्याग, तपस्या और धर्म की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। सनातन धर्म के संरक्षण संवर्द्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। सभी को उनके जीवन दर्शन से प्रेरणा लेकर मानव कल्याण में योगदान करना चाहिए। महंत प्रेमदास महाराज ने कहा कि साकेतवासी महामंडलेश्वर नारायण दास महाराज संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे। उनका पूरा जीवन धर्म व अध्यात्म को समर्पित रहा। महंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि साकेतवासी गुरूदेव महामंडलेश्वर नारायण दास महाराज विलक्षण संत थे। उनकी पुण्यतिथी पर सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए सनातन धर्म के संरक्षण संवर्द्धन का संकल्प लेना चाहिए। महंत राजेंद्रदास, साध्वी विजय लक्ष्मी, साध्वी वैष्णवी जयश्री ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर डा.महंत रामेश्वरदास, महंत अरूणदास, महंत दुर्गादास, महंत जगदीश दास, महंत विमलदास बापू, महंत श्यामचरण दास, महंत प्रेमदास, महंत विष्णुदास, महंत रघुवीर दास, महंत बिहारी शरण, महंत प्रह्लाद दास, महंत प्रमोद दास, महंत गोविंददास, महंत अंकित शरण, महंत सूरजदास सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।