30 August 2025

गंगा की सफाई के नाम पर बेशकीमती जमीन हड़पने की तैयारी, बाणगंगा बना नया निशाना”

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सम्पादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार (रिपोर्ट विकास झा) हरिद्वार की सीमा से सटे पवित्र बाणगंगा क्षेत्र की सैकड़ों बीघा बेशकीमती जमीन नेताओं, कालनेमी संतों और भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि में फंसी हुई है।
जिस बाणगंगा की सफाई कभी किसी नेता को दिखाई नहीं दी, वही नेता बाणगंगा को स्वर्ग बनाने का अभिनय कर रहे हैं। गंगा में गिरते नालों, प्रदूषण और अतिक्रमण पर आंखें मूंदने वाले नेता बाणगंगा के ‘स्वच्छता मिशन’ के नाम पर अपना अधिकार जताकर उसकी जमीन को हड़पने की तैयारी में जुटे हैं।

 

बताते चलें कि उत्तराखंड की पवित्र भूमि आज उस मोड़ पर खड़ी है, जहां आस्था, पर्यावरण और जनहित की कीमत सिर्फ रजिस्ट्रियों और ज़मीन के सौदों में तय की जा रही है। उत्तर प्रदेश से अलग होकर बने राज्य उत्तराखंड की माटी को समृद्ध बनाने के लिए जो सपने बुने गए थे, वे अब नेताओं और भू-माफियाओं की सौदेबाज़ी में दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार,
बाणगंगा क्षेत्र कोई सामान्य इलाका नहीं है। यह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा से लगा ऐसा भूखंड है, जिसका प्रशासनिक नियंत्रण स्पष्ट नहीं लेकिन भूमाफिया के लिए यह सबसे बड़ा ‘सुनहरा मौका’ बन चुका है।
सूत्र बताते हैं कि यहां फर्जी दस्तावेज, अवैध संत स्थलों और ट्रस्टों के नाम पर जमीन पर कब्जा दिखाकर उसे लाखों-करोड़ों में बेचने की तैयारी जोरों पर है। नेताओं की मिलीभगत से “सफाई अभियान” सिर्फ एक मुखौटा है, असल में जमीन की दलाली का खेल शुरू हो चुका है। यह वही उत्तराखंड है जिसकी हर जमीन को देवभूमि कहा गया, जहां बाणगंगा जैसे तीर्थों को ऋषियों ने तपोभूमि बनाया। आज वहीं भूमि लालच की लाश पर खड़ी सत्ता की दुकान बन गई है। यदि शासन-प्रशासन और जनता ने समय रहते आवाज़ नहीं उठाई, तो आने वाले वर्षों में बाणगंगा जैसी पवित्र धरोहरें रजिस्ट्री के दस्तावेजों में दफन हो जाएंगी।

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