मन की इच्छा आकांक्षा और अभिलाषा मनुष्य को सीमित रखनी चाहिये श्री महंत कमलेशा नन्द सरस्वती
सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार 20 फरवरी 2025 (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानन्द) भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए श्री गंगा भक्ति आश्रम खड़खड़ी हरिद्वार के परमाध्यक्ष श्री महंत कमलेशा नन्द सरस्वती महाराज ने कहा मनुष्य को अपनी बढ़ती इच्छाओं पर अंकुश लगाना चाहिये इच्छा जिज्ञासा और आकांक्षाये मन को भटकाती है सुख सुविधा साधन और आसान जिंदगी आपको दूसरों पर निर्भर कर देती है किंतु मनुष्य को स्वयं खुद सक्षम होना चाहिये कभी दूसरों पर किसी भी बात के लिये किसी भी कार्य के लिये निर्भर नहीं रहना चाहिये और मस्त मन से राम भजन करना चाहिये अन्यथा आप अपने कर्म फल के भोग बढ़ा रहे हैं जो सेवाये आप अब दूसरों से ले रहे हैं दूसरों से दासता करवा रहे हैं वही दासता आपको अगले जन्म में उसकी करनी पड़ेगी इसलिये अपने जन्मो जन्म के प्रालब्ध मत बढ़ाओ इस जीवन को दूसरों पर निर्भर मत करो जितना भी हो सके दूसरों की सेवाये काम ले अपने अधिकतर घरेलू कार्य रोज मरहा के कार्य खुद करें तभी आपका यह जीवन सार्थक हो पायेगा इस जीवन को निरार्थक ना करें राम भजन से हरि भजन से अपने जीवन को महका दे और इस मानव जीवन को सार्थक कर ले
 

