तुलसीदास जी ने भी स्वयं राम नाम को राम से श्रेष्ठ बताया है महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज
संपादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) सप्सरोवर रोड स्थित प्रसिद्ध श्री हनुमान गुफा जो स्थान सदा से सिद्ध संतों की तपोस्थली रहा है में अनंत विभूषि प्रातः स्मरणीय परम वंदनीय महामंडलेश्वर श्याम दास जी महाराजतराम ने अपने श्री मुख से ज्ञान की अमृत वर्षा का प्रवाह करते हुए कहा रामनाम की महिमा अनंत, अपार और अवर्णनीय है। यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीवन का सार और आत्मा की शक्ति है। राम नाम में वह दिव्य ऊर्जा समाहित है जो मनुष्य के अंतर्मन को शुद्ध कर उसे सत्य और धर्म के मार्ग पर अग्रसर करती है। जब व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ राम नाम का स्मरण करता है, तो उसके मन के विकार शांत होने लगते हैं और चित्त निर्मल हो जाता है। राम नाम का जप न केवल आध्यात्मिक उन्नति का साधन है, बल्कि यह सांसारिक जीवन में भी संतुलन और शांति प्रदान करता है। संकट, दुःख और भय के समय राम नाम ढाल बनकर मनुष्य की रक्षा करता है और उसे धैर्य तथा साहस देता है। संत-महात्माओं ने राम नाम को भवसागर से पार उतरने का सरलतम उपाय बताया है, क्योंकि इसमें अहंकार, लोभ और मोह को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता है। राम नाम का प्रभाव इतना व्यापक है कि अनपढ़, साधारण और पतित समझे जाने वाले व्यक्ति भी इसके स्मरण से महान बन गए। यह नाम जाति, वर्ग, धन या पद का भेद नहीं करता, बल्कि सभी को समान रूप से अपनाता है। राम नाम का निरंतर स्मरण व्यक्ति को करुणा, प्रेम, सेवा और सत्यनिष्ठा जैसे गुणों से परिपूर्ण करता है। इससे मनुष्य का आचरण पवित्र होता है और समाज में सद्भाव तथा नैतिकता का विकास होता है। तुलसीदास जी ने राम नाम को स्वयं राम से भी श्रेष्ठ बताया है, क्योंकि नाम के माध्यम से ही राम का साक्षात्कार संभव है। राम नाम वह प्रकाश है जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का मार्ग दिखाता है। यही कारण है कि युगों-युगों से राम नाम जन-जन की आस्था का केंद्र बना हुआ है और इसकी महिमा न कभी घटती है, न समाप्त होती है, बल्कि समय के साथ और अधिक उज्ज्वल होती जाती है।
 

