जो गुरु आपका ईश्वर से आत्मिक साक्षात्कार करा दे उनका महत्व हमारे जीवन में ईश्वर से कम नहीं होता श्री श्री आनंदमयी साधना मां
संपादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद)कनखल दक्ष रोड स्थित माधव आश्रम श्री श्री आनंदमयी कविता मां आश्रम में भक्त जनों के बीच अपने श्री मुख से ज्ञान का प्रवाह करते हुए साक्षात मां काली मां दुर्गा का ममता मयी स्वरूप अनंत विभूषित गुरु भगवान श्री श्री आनंदमयी साधना मां सनातन में गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहाभारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के तुल्य माना गया है, क्योंकि गुरु ही वह दिव्य माध्यम हैं जो अज्ञानता के अंधकार से हमें निकालकर ज्ञान के प्रकाश की और ले जाते हैं। गुरु न केवल हमें जीवन जीने की सही दिशा दिखाते हैं, बल्कि हमारे भीतर छिपी हुई आत्मिक शक्ति को भी जाग्रत करते हैं। इसी कारण कहा गया है कि गुरु भगवान का साकार स्वरूप होते हैं, क्योंकि ईश्वर की कृपा हमें गुरु के रूप में ही प्राप्त होती है। गुरु का स्थान माता-पिता से भी ऊँचा माना गया है, क्योंकि वे हमें केवल जन्म नहीं, बल्कि सही जीवन का बोध कराते हैं।भगवान के विभिन्न स्वरूपों की आराधना जिस प्रकार हमारे देवी-देवताओं के माध्यम से होती है, उसी प्रकार गुरु भी ईश्वरीय चेतना के प्रतीक होते हैं। गुरु के वचन, आचरण और करुणा में ईश्वर का ही प्रतिबिंब दिखाई देता है। वे शिष्य को भक्ति, सेवा, संयम और सत्य के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। गुरु के चरणों में श्रद्धा रखने से मनुष्य का जीवन पवित्र और सार्थक बन जाता है।हमारी परंपरा में माता की उपासना का भी विशेष महत्व है। अनेक संत महिलाएँ, जिन्होंने मातृत्व, करुणा और त्याग को अपने जीवन का आधार बनाया, देवी के स्वरूप के रूप में पूजनीय मानी गई हैं। उनका जीवन प्रेम, सहनशीलता और सेवा का जीवंत उदाहरण रहा है। ऐसी संत महिलाएँ केवल उपदेश नहीं देतीं, बल्कि अपने आचरण से समाज को दिशा प्रदान करती हैं। उनके भीतर शक्ति, ममता और दिव्यता का अद्भुत संगम दिखाई देता है, जो उन्हें देवी-स्वरूप बनाता है| गुरु, देवी-देवता और संत महिलाएँ—तीनों ही ईश्वर की कृपा के विभिन्न रूप हैं। इनके प्रति श्रद्धा और सम्मान रखने से मनुष्य का जीवन उच्च आदर्शों से भर जाता है। जब हम गुरु की वाणी को हृदय में धारण करते हैं, देवी-देवताओं की आराधना करते हैं और संत महिलाओं के आदर्शों को अपनाते हैं, तब हमारा जीवन आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है। यही हमारी संस्कृति की सुंदरता और गहराई है, जो हमें ईश्वर से जोड़कर मानवता का सच्चा मार्ग दिखाती है। आनंदमयी साधना मां ने कहा जो आपको जीवन की सही पर करा दे और आपका आत्मिक ईश्वर से साक्षात्कार करा दे वह गुरु ईश्वर से कम नहीं होती
 

