19 August 2026

मनुष्य के ज्ञान की सीमाएँ अनंत हैं, परंतु उस अपार ज्ञान-निधि को देखने और समझने के लिए जिन नेत्रों की आवश्यकता होती है – श्री श्याम दास महाराज

विज्ञापन

संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार सप्तसरोवर मार्ग स्थित प्रसिद्ध श्री हनुमान गुफा में भक्त जनों के बीच ज्ञान की अमृत प्रेम की वर्षा करते हुए अनंत विभूषित प्रातः स्मरणीय 1008 महामंडलेश्वर श्री श्री श्याम दास जी महाराज ने कहा मनुष्य के ज्ञान की सीमाएँ अनंत हैं, परंतु उस अपार ज्ञान-निधि को देखने और समझने के लिए जिन नेत्रों की आवश्यकता होती है, उन्हें खोलने का कार्य हमारे सतगुरु करते हैं। सतगुरु केवल शिक्षक नहीं होते, वे ईश्वर के रूप में हमारे जीवन में मार्गदर्शक बनकर आते हैं। वे हमें अज्ञानता के अंधकार से निकालकर सत्य, विवेक और ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।सतगुरु हमारे भीतर छिपी हुई प्रतिभा और चेतना को जाग्रत करते हैं। उनके उपदेश हमारे ज्ञान को न केवल प्रकट करते हैं, बल्कि उसका निरंतर विकास भी करते हैं। वे हमें जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराते हैं औरआत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। उनके सान्निध्य में मनुष्य का विचार शुद्ध होता है, आचरण श्रेष्ठ बनता है और आत्मा उन्नति की ओर अग्रसर होती है।सतगुरु की कृपा से मनुष्य का जीवन केवल सांसारिक सफलता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह उद्धार और आत्मिक शांति की ओर बढ़ता है। इस प्रकार सतगुरु हमारे जीवन में दीपक के समान हैं, जिनके प्रकाश से ज्ञान का विस्तार होता है और जीवन सार्थक बन जाता है। जो भक्त गुरु की शरणागत होते हैं वह ईश्वर मिलन की और जाने वाली नैया में सवार होती

 

विज्ञापन
Copyright © All rights reserved. | Sakshar Haridwar Powered by www.WizInfotech.com.