गुरु मां आनंदमयी साधना मां साक्षात मां दुर्गा का वह ममतामयी और तेजस्वी स्वरूप हैं
संपादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) हरिद्वार पावन धरा पर कनखल दक्ष रोडस्थित श्री माधव आश्रम श्री श्री आनंदमयी कविता मां आश्रम वह पवित्र केंद्र है जहां से सनातन धर्म और संस्कृति का शंखनाद संपूर्ण विश्व में गूंज रहा है और इस आश्रम की पावन परिधि में श्री श्री आनंदमयी साधना मां के सानिध्य में होने वाली आध्यात्मिक क्रियाएं केवल व्यक्तिगत शांति का साधन नहीं हैं बल्कि वे वैश्विक स्तर पर सनातन परंपराओं को पुनर्स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी हैं। साधना मां के व्यक्तित्व में मां दुर्गा की शक्ति और मां अन्नपूर्णा की करुणा का जो विलक्षण संगम दिखाई देता है वह आज के भौतिकवादी युग में भटकती हुई मानवता के लिए एक शीतल छांव के समान है जो हर दुखी हृदय को शांति प्रदान करता है और हरिद्वार के इस दिव्य आश्रम से निकलने वाली धर्म की प्रतिध्वनि समस्त दिशाओं में भारतीय ऋषि परंपरा की महानता का यशोगान कर रही है। जब साधना मां अपने मुखारविंद से ज्ञान की गंगा प्रवाहित करती हैं तो ऐसा प्रतीत होता है मानो साक्षात भगवती अपने भक्तों का मार्गदर्शन कर रही हों और उनके द्वारा संचालित धर्म का यह संतनाद संकुचित विचारधाराओं को तोड़कर संपूर्ण विश्व को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है जिससे विश्व के कोने-कोने में सनातन धर्म की जड़ें पुनः मजबूत हो रही हैं और श्री माधव आश्रम एक ऐसे प्रकाश स्तंभ के रूप में उभरा है जो अंधकार में डूबे संसार को ज्ञान और भक्ति के प्रकाश से आलोकित करने का संकल्प लिए हुए है। इस आध्यात्मिक यात्रा में साधना मां का हर कदम लोक कल्याण के लिए समर्पित है और उनकी दिव्य उपस्थिति में होने वाले अनुष्ठान और जप-तप संपूर्ण ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा को जागृत कर रहे हैं जिससे न केवल धर्म की रक्षा हो रही है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का निर्माण भी हो रहा है और इसीलिए आज संपूर्ण विश्व की दृष्टि हरिद्वार के इस पावन धाम पर टिकी है जहां से मां दुर्गा के स्वरूप में साधना मां सनातन सत्य का उद्घोष कर रही हैं। ब्रह्मलीन पूज्य गुरु मां श्री श्री योगेश्वरी आनंदमयी कविता मां जी के मकर संक्रांति षोडश पुण्यतिथि वार्षिक उत्सव में 14 जनवरी 2026 को भजन संध्या कथा वार्षिक उत्सव भंडारे में सभी भक्तजन पधार कर ज्ञान की सरिता में स्नान कर अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ करें
 

