बाबा विश्व नाथपुरी जी महाराज की पावन स्मृति में 36 वा विशाल भंडारा श्री महंत रवींद्र पुरी जी महाराज के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ

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संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद )श्री प्राचीन हनुमान मंदिर हनुमान घाट निकट कुशा घाट में संपन्न हुआ इस अवसर पर प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी जी महाराज की गरिमा मय उपस्थित के बीच संपन्न हुआ इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत रवि पुरी जी महाराज ने कहागुरु के चरणों की रज मनुष्य को बड़े ही दुर्लभ सौभाग्य से प्राप्त होती है, क्योंकि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि जीवन को दिशा देने वाली दिव्य चेतना होते हैं। गुरु का सान्निध्य वही प्राप्त करता है, जिसके जीवन में पूर्व जन्मों के पुण्य संस्कार जाग्रत हो चुके होते हैं। गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करते हैं और शिष्य को सत्य के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। सतगुरुदेव इस पृथ्वी लोक पर साक्षात ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में अवतरित होकर मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं और उसे आत्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं। गुरु का मार्गदर्शन मनुष्य को सही और गलत का भेद सिखाता है तथा उसे जीवन की प्रत्येक परीक्षा में धैर्य और विवेक से आगे बढ़ना सिखाता है। गुरु की कृपा से मनुष्य का आचरण शुद्ध होता है, विचार पवित्र होते हैं और कर्म श्रेष्ठ बनते हैं। गुरु अपने शिष्यों को केवल विद्या ही नहीं देते, बल्कि उन्हें संस्कार, संयम, सेवा, करुणा और सत्य का पाठ भी पढ़ाते हैं। जिस मनुष्य के जीवन में गुरु का आशीर्वाद होता है, उसके मार्ग के सभी विघ्न धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं और उसका जीवन सुगम बन जाता है। गुरु शिष्य को यह सिखाते हैं कि भौतिक सुख क्षणिक हैं, जबकि आत्मिक शांति ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। गुरु की वाणी अमृत के समान होती है, जो दुखों से पीड़ित मन को शांति प्रदान करती है और निराशा में आशा का संचार करती है। गुरु के उपदेश जीवन की हर परिस्थिति में मार्गदर्शक बनते हैं और मनुष्य को सत्य, धर्म और न्याय के पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देते हैं। गुरु की कृपा से ही मनुष्य अपने अहंकार, क्रोध और मोह पर विजय प्राप्त करता है और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होता है। ऐसा माना जाता है कि गुरु ही वह सेतु हैं, जो शिष्य को ईश्वर से जोड़ते हैं और उसे मोक्ष के मार्ग पर ले जाते हैं। गुरु के बिना जीवन दिशाहीन नौका के समान होता है, जो कभी भी भटक सकती है, किंतु गुरु का हाथ थाम लेने पर जीवन सुरक्षित तट की ओर बढ़ता है। गुरु अपने शिष्यों का लोक और परलोक दोनों सुधार देते हैं और उनके जीवन को सार्थक, पवित्र तथा मंगलमय बना देते हैं। इसलिए गुरु का स्थान जीवन में सर्वोच्च होता है और गुरु के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण ही मनुष्य को सच्ची सफलता और शांति प्रदान करता है। इस अवसर पर अनेकों आश्रम मठ मंदिरों से आये संत महापुरुष तथा भारी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे सभी ने आयोजित भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया

 

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