मन की इंद्रियों पर लगाम लगाना ही सच्चे साधक की पहचान है श्री महंत रघुवीर दास महाराज
हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े के परमाध्यक्ष श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने भक्त जनों के बीच ज्ञान की वर्षा करते हुए जीवन की सार्थकता का मार्ग प्रशस्त किया। महाराज जी ने अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि जो मनुष्य अपनी इंद्रियों को पूरी तरह साध लेता है और अपने चंचल मन पर लगाम लगा लेता है, वही वास्तव में सच्चा साधक और संत कहलाने का अधिकारी है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और यह बार-बार प्राप्त नहीं होता। यदि मनुष्य मन की चंचलता और इंद्रियों के वशीभूत होकर रह जाए, तो उसका यह कीमती जीवन पूरी तरह निरर्थक हो सकता है। महाराज जी के अनुसार, इस संसार की मोह-माया के बीच रहते हुए भी जो अपने मन को वश में कर ले और उसे भटकने से रोक ले, वही सच्चा साधु है। अतः जीवन की सार्थकता इसी में है कि हम अपनी इंद्रियों के दास बनने के बजाय उनके स्वामी बनें।
 

