प्रसिद्ध श्री रमनरेती आश्रम में परमात्मा स्वरूप, प्रातः स्मरणीय गुरुदेव स्वामी कार्ष्णि सर्वज्ञानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में विशाल संत समागम एवं संत भंडारे का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ,
हरिद्वार के भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध श्री रमनरेती आश्रम में आज परमात्मा स्वरूप, प्रातः स्मरणीय गुरुदेव स्वामी कार्ष्णि सर्वज्ञानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में एक विशाल संत समागम एवं संत भंडारे का भव्य आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और भक्तों की भारी उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया। आश्रम परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था और हर ओर भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चारण तथा सत्संग की मधुर ध्वनि गूंज रही थी, जिससे उपस्थित जनमानस को अद्भुत शांति और आत्मिक आनंद की अनुभूति हो रही थी। इस पावन अवसर पर गुरुदेव ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में जीवन के वास्तविक मूल्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सफल और सार्थक होता है जब उसके हृदय में दया, करुणा और परोपकार के भाव स्थायी रूप से निवास करते हैं, उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति दूसरों के दुःख को समझता है, उनके प्रति सम्मान और सहानुभूति रखता है तथा गौ सेवा और निर्बल, असहाय एवं निःस्वार्थ जीवों की सेवा में अपना योगदान देता है, वही सच्चे अर्थों में ईश्वर की सच्ची भक्ति करता है और अंततः ईश्वर की कृपा का अधिकारी बनता है। गुरुदेव ने आगे कहा कि इस नश्वर संसार में हरि का सतत स्मरण और गुरु द्वारा प्रदान किए गए दिव्य ज्ञान को अपने जीवन में धारण करने वाला व्यक्ति अपने जीवन को अज्ञानता और मोह-माया के बंधनों से मुक्त कर उद्धार की ओर अग्रसर करता है, उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि दान, सत्य कर्म और दया जैसे गुण ही मानव जीवन की वास्तविक पूंजी हैं और इनसे बड़ा कोई धर्म या पुण्य कार्य नहीं हो सकता, यही गुण मनुष्य को महान बनाते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देते हैं। संत समागम के उपरांत विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य किया और सेवा भाव के इस पवित्र आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया, पूरे आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आध्यात्मिकता, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलकर ही जीवन को सच्चे अर्थों में सफल और सार्थक बनाया जा सकता है। इस अवसर पर बोलते हुए श्री श्याम अदलखा जी ने कहा इस संसार में सतगुरु देव ईश्वर की प्रतिमूर्ति के रूप में हम भक्तों के मार्गदर्शन हेतु अवतरित होते हैं और जो लोग सतगुरु के बताए मार्ग पर चलते हैं उनके दिये गये ज्ञान का अनुसरण करते हैं उनके भाग्य का उदय हो जाता है उनका लोक एवं परलोक दोनों सुधर जाते हैं सतगुरु के चरणों की रज और सतगुरु के श्री मुख से प्रवाहित होने वाला ज्ञान हमारे मानव जीवन को धन्य तथा सार्थक कर देता है इस अवसर पर महंत दुर्गादास महाराज महंत प्रेमानंद महाराज महंत अमृतानंद महाराज महामंडलेश्वर गंगादास महाराज सहित भारी संख्या में आश्रम मठ मंदिर अखाड़ों से आए संत महापुरुष तथा भक्तजन उपस्थित थे
 


