देव स्वरूप महाराज को अपना उत्तराधिकारी बनाया स्वामी कृष्ण स्वरूप महाराज ने

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हरिद्वार खड़खड़ी रेलवे क्रॉसिंग से पूर्व साहेब धाम वाली गली मेंस्थित श्री चंदन कृष्ण आश्रम में आज एक अत्यंत भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण का साक्षी बना, जहाँ प्रातः स्मरणीय परमात्मा स्वरूप महंत स्वामी कृष्ण स्वरूप जी महाराज के पावन सान्निध्य में पट्टाभिषेक एवं उत्तराधिकारी घोषणा का ऐतिहासिक समारोह बड़े ही धूमधाम, श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। श्री देव स्वरूप महाराज को उन्होंने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया आश्रम परिसर प्रातःकाल से ही भक्तों, संत-महापुरुषों, श्रद्धालुओं और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति से भक्तिमय हो उठा था। वैदिक मंत्रोच्चार, पुष्पवर्षा, शंखध्वनि तथा जयघोषों के मध्य स्वामी कृष्ण स्वरूप जी महाराज ने अपने सेवा-भावी, समर्पित और संस्कारवान शिष्य श्री देव स्वरूप को आश्रम का उत्तराधिकारी घोषित करते हुए उनका विधिवत पट्टाभिषेक किया। यह अवसर केवल उत्तराधिकार सौंपने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि गुरु परंपरा, सेवा, तप, त्याग और सनातन संस्कृति के संरक्षण का एक प्रेरणादायी क्षण भी था।

 

अपने पावन वचनों में स्वामी कृष्ण स्वरूप जी महाराज ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय आध्यात्मिक जीवन की आत्मा है। उन्होंने कहा कि उत्तराधिकारी वही होता है जो केवल पद नहीं, बल्कि सेवा, विनम्रता, धर्मनिष्ठा और समाज के प्रति समर्पण को अपने जीवन का ध्येय बनाता है। उन्होंने अपने शिष्य को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आश्रम की मर्यादा, संत परंपरा की गरिमा और मानव सेवा की भावना को आगे बढ़ाना ही सच्चा उत्तरदायित्व है। महाराज श्री ने यह भी कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के कल्याण, मानवता की सेवा और संस्कारों के संरक्षण का माध्यम है। उनके इन प्रेरणादायी शब्दों ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।

इस पावन अवसर पर उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ा दिया। अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि संत समाज सदैव राष्ट्र और समाज को सही दिशा देने का कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि संतों का आशीर्वाद समाज को नैतिकता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ता है। उन्होंने स्वामी कृष्ण स्वरूप जी महाराज के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आश्रम केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, सेवा और सद्भाव के केंद्र होते हैं। मंत्री श्री कौशिक ने नव घोषित उत्तराधिकारी को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे गुरु परंपरा की गरिमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगे और जनसेवा के कार्यों को और अधिक विस्तार देंगे।समारोह के दौरान संत-महापुरुषों की गरिमामयी उपस्थिति, श्रद्धालुओं की आस्था और भक्तों के उत्साह ने पूरे वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया। आश्रम परिसर जय श्री राम, हर हर महादेव और गुरु महाराज की जय के जयघोषों से गुंजायमान रहा। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि समाज को सेवा, संस्कार और परंपरा के संरक्षण का संदेश देने वाला एक प्रेरणादायी अवसर भी सिद्ध हुआ। पूरे कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण और संत आशीर्वचन के साथ अत्यंत श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर अनेको आश्रमों के महंत श्री महंत महामंडलेश्वर तथा संत महापुरुष उपस्थित थे सभी ने कार्यक्रम के पश्चात आयोजित भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया

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