श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के तत्वावधान में धूमधाम से मनायी गयी तुलसीदास जयंती
संपादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार, 19 अगस्त। श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदास की 529वीं जयंती धूमधाम से मनायी गयी। इस अवसर पर रामानंदीय वैष्णव मंडल के अध्यक्ष बाबा हठयोगी एवं श्री रामानंद आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर महंत प्रेमदास महाराज के सानिध्य में श्रवणनाथ नगर स्थित श्री रामानंद आश्रम से मायापुर स्थित तुलसी चौक तक शोभायात्रा निकाली गयी। संतों ने तुलसी चौक पर गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा पर माल्यापर्ण व पूजा अर्चना कर सभी को तुलसी जयंती की शुभकामनाएं दी। इसके पश्चात श्री रामानंद आश्रम में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए बाबा हठयोगी ने कहा कि रामचरित मानस जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले गोस्वामी तुलसी दास की शिक्षाएं ही समाज में व्याप्त जातिवाद जैसी कुरीतियों को दूर कर सकती है। रामचरित मानस में शबरी के हाथों राम को बेर खिलाने व राम के भील को गले लगाने के प्रसंग से तुलसीदास ने इसका स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय समाज में जातिवाद जैसी बुराई के लिए कभी कोई स्थान नहीं रहा है। श्रीमहंत विष्णुदास ने कहा कि रामचरित मानस के माध्यम से मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने वाले गोस्वामी तुलसीदास प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त थे। जगतगुरू स्वामी अयोध्याचार्य महाराज एवं महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की राम भक्ति की धारा को आगे बढ़ाने में वैष्णव संतों का प्रमुख योगदान है। महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना कर समाज को भक्ति का जो संदेश दिया, वह आज भी सार्थक है। महंत प्रेमदास महाराज ने सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के रूप में अमृत रूपी राम कथा प्रदान कर संसार को धन्य कर दिया। प्रभु श्रीराम के प्रति गोस्वामी तुलसीदास की अटूट भक्ति सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। श्रीमहंत रामलखन दास महाराज ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के माध्यम से समाज को राम भक्ति का संदेश दिया। महामंडलेश्वर महंत प्रेमदास, महंत गोविंददास, स्वामी रविदेव शास्त्री एवं महंत बिहारी शरण ने फूलमाला पहनाकर सभी संतों का स्वागत किया। इस अवसर पर महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज, महंत राघवेंद्र दास, महंत दुर्गादास, स्वामी दिनेश दास, संत जगजीत सिंह, महंत सूरज दास, महंत राजेंद्रदास, महंत नारायण दास पटवारी, महंत प्रह्लाद दास, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, महंत नवल किशोर दास, संत हरिदास, महंत प्रमोद दास, महंत अंकित शरण सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
 

