25 August 2026

जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी और उर्स-ए-साबिर पाक पर कलियर शरीफ में रौनक, जायरीनों का पहुंचना शुरू

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संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार,कलियर शरीफ,जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी और हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के सालाना उर्स के आगाज पर पिरान कलियर दरगाह शरीफ में अकीदतमंदों का आना शुरू हो गया है।

 

उर्स के मौके पर मुरादाबाद से सैयद इकबाल मियां और ज्वालापुर से सूफी नौशाद अहमद साबरी अपने खादिमों और मुरीदों के साथ दरगाह परिसर पहुंचे और यहां ठहरे हुए हैं। दोनों ने दरगाह में चादरपोशी कर अमन-चैन की दुआ की।

इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में दोनों ने हजरत साबिर पाक की दास्तान, उनकी करामातों और शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला

मुरादाबाद से आए सैयद इकबाल मियां ने कहा कि “हम हर साल साबिर पाक के उर्स पर हाजरी देने आते हैं। हजरत साबिर पाक का पैगाम सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए है। उन्होंने 12 साल तक भूखे-प्यासे रहकर इबादत की और दुनिया को सब्र सिखाया। इसीलिए उन्हें साबिर कहा गया। उनका दरबार वह दरबार है जहां से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का यह मुबारक महीना और उर्स का यह पाक मौका हम सबके लिए अल्लाह की रहमत लेकर आता है।

ज्वालापुर से आए सूफी नौशाद अहमद साबरी ने कहा कि “हजरत साबिर पाक की तालीम मोहब्बत, भाईचारा और एकता की तालीम है। आज के दौर में जब लोग नफरत की बात करते हैं, तब साबिर पाक का पैगाम हमें इंसानियत जोड़ने का रास्ता दिखाता है। हमने यहां आकर देश में अमन-अमान, गंगा-जमुनी तहजीब और खुशहाली के लिए दुआ की है। सरकार और दरगाह प्रशासन ने जायरीनों के लिए अच्छे इंतजाम किए हैं, इसके लिए हम शुक्रगुजार हैं।”

दोनों ने कहा कि उर्स मेले में लाखों जायरीन आते हैं और सभी धर्मों के लोग यहां आकर अपनी मुरादें मांगते हैं। आने वाले दिनों में उर्स की मुख्य रस्मों के चलते जायरीनों की संख्या में भारी इजाफा होगा।

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