मनुष्य की बुद्धि का विकास और सही ज्ञान ही उसे बुलंदियों के शिखर पर ले जा सकता है ज्ञान हमें गुरु से ही प्राप्त हो सकता है श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज
प्रमोद कुमार हरिद्वार
मनोज ठाकुर,हरिद्वार श्यामपुर स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम मे भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए आश्रम के परमाध्यक्ष परम विभूषित 1008 श्री महंत श्यामसुंदर दास जी महाराज ने कहा मनुष्य द्वारा अपने जीवन में अर्जित किया गया ज्ञान ही उसे बुलंदियों के शिखर पर पहुंचा सकता है जब तक आप किनारा नहीं छोड़ते तब तक आप नये समुद्र की खोज नहीं कर सकते जीवन उसी का सुखद तथा मस्त होता है जो भजन के साथ-साथ कार्यों में व्यस्त है परेशान वही है जो दूसरों की खुशियों से त्रस्त है इसलिए दूसरों पर ध्यान देने के बजाय जो जगत को चलाने वाला है जो सभी को देखने वाला है उस पर ध्यान दो उसके ध्यान में मगन रहो अगर आपकी कोई प्रशंसा कर रहा है तो वह खुशी की बात नहीं है उस पर गंभीरता से अमल करना चाहिए तथा सावधान रहने की जरूरत होती है जिस प्रकार अधिक मीठा खाने से शुगर हो सकती है वह आपके शरीर में जहर के रूम में काम कर सकती है उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में अधिक प्रशंसा करने वालों का होना भी अत्यंत दुखद की बात है आपकी अधिक प्रसन्नता आपकी आगे बढ़ाने की गति को धीमी कर सकती है तथा आपको प्रसन्नता के भवन में फंसने वाले आपको किसी उलझन में भी डाल सकते हैं इसलिए अगर आपकी कोई प्रशंसा कर रहा है तो उस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता नहीं इसका अर्थ यह है कि वह आपको बातों का प्रलोभन दे रहा है प्रलोभन चाहे किसी भी चीज का हो वह सही नहीं होता मनुष्य को किसी प्रशंसा वस्तु का गुलाम नहीं होना चाहिए जीवन में किसी चीज की इच्छा होना उसे गुलाम बनती है इसलिए इच्छा रखती है तो भगवान को प्राप्त करने की रखो भगवान के भजन की रखो भगवान का गुलाम बनने में कोई बुराई नहीं दिया इसलिए सुख की आशा और भोग यह तीनो संपूर्ण दुखो का कारण बन सकते हैं हां इतना जरूर है कि अगर आप किसी जरूरतमंद या इंसान की मदद करते हैं तो उस से दुनिया तो नहीं बदलने वाली लेकिन जिस इंसान की मदद करेंगे उसकी दुनिया तो अवश्य बदल सकती है मनुष्य जीवन का सत्य तेल की बूंद की तरह होता है जितने भी गहरे पानी में डालकर छुपाने की कोशिश कीजिए पर वह तैरकर ऊपर ही रहता है इसलिए सच्चाई कुछ कभी छुपाए नहीं यदि हमारी आदतो मे गुस्सा अकड और घमंड है तो हमें बर्बाद करने के लिए दुश्मन की आवश्यकता नहीं हम खुद ही अपनी बर्बादी के लिए काफी है इंसान की सबसे बड़ी गलती है कि वह भगवान से पहले इंसान के सामने रोता है इंसान के सामने अपनी इच्छाएं प्रकट करने से अच्छा हैजो इस जगत को बनाने वाले हैं जो इस जगत को चलाने वाले हैं जो इस जगत के संचार करता है जो इस जगत के उत्पत्ति करता है उनके समक्ष अपनी बात रखें मनुष्य जो अपने लिए करता है वह आपके साथ चल जाएगा किंतु जो मनुष्य दूसरों के लिए करता है वह सदैव आपकी विरासत के रूप में संसार में विद्यमान रहेगा मनुष्य को हमेशा ध्यान रखना चाहिए की मुश्किलों भरा समय आपको कुछ समय के लिए तनावग्रस्त रख सकता है लेकिन वह जीवन का छोटा सा हिस्सा है पूरे जीवन नहीं अगर आपके ज्ञान और बुद्धि का विकास सही है तो आप किसी भी समस्या से जल्द ही उभर कर बाहर आ सकते हैं मनुष्य के विचारों का स्तर उसकी संगत पर निर्भर करता है हमारी संगत कितनी अच्छी होगी हम उतने ही अच्छे विचार के धनी हो सकते हैं जीवन में नींद और निंदा पर विजय पा लेने वाले को विजयपथ की ओर बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता इसलिए सो कर नींद में समय व्यर्थ करने से अच्छा है ज्ञान अर्जित करो हरि का सत्संग करो और गुरुजनों की संगत करो निंदा करने से अच्छा है चुप रहो गंभीर बनो और वीर बनो इन सब चीजों के लिए विद्वानों के बीच उच्च कोटि की संगत करना आवश्यक होता है क्योंकि यह आप पर निर्भर कर रहा है आप कैसे लोगों के बीच उठ बैठ रहे हैं कैसे लोगों की संगत कर रहे हैं अगर आप विद्वान लोगों के बीच बैठेंगे तो आपकी बुद्धि का स्वतः ही विकास होने लगेगा किंतु अगर विद्वान के बीच भी आपको अहंकार लग रहा है तो वह व्यक्ति रावण के समान विद्वान हो सकता है क्योंकि विद्वान के अंदर भी अहंकार आ जाता है और उसी का अहंकार उसे खा जाता है इसलिए जीवन में शांति और अहंकार मुक्त जीवन का होना आवश्यक है अगर आप अज्ञानी नशेड़ी लोगों की संगत करेंगे तो उसी और बढ़ेंगे और अपने पतन का मार्ग चुनेगे क्योंकि जब कोई व्यक्ति गलत काम करने की ओर बढ़ता है तो उसके अंदर से आवाज आती है कि यह गलत है इसे मत करो इससे नुकसान हो सकता है तभी व्यक्ति को समझ जाना चाहिए कि उसके अंदर बैठा ईश्वर उसकी मार्गदर्शन कर रहा है अगर तब भी समझ में ना आए तो गुरुजनों की संगत में जाओ उनके मार्गदर्शन के अनुसार आगे बढ़ो
 

