जड एवम चैतन्य दोनों में ही भगवान शिव समाहित शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा पर बोले परम पूज्य श्री आचार्य महंत शीतलानन्द महाराज
सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार 26 फरवरी 2025 (वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद )कनखल होली मोहल्ला स्थित श्री सुखदेव चरण दासिय धर्मशाला आश्रम में शिव परिवार के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए श्री महंत शीतलानन्द महाराज ने कहा इस सृष्टि की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई है एवं इस चराचर सृष्टि को एक दिन उन्हें में समाहित हो जाना है जो जड़ है वही चैतन्य है और जो चैतन्य है वही जड़ है दोनों भगवान शिव ही है कथा व्यास श्री दिनेशानन्द जी ने कहा जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु भी निश्चित है यह चराचर सृष्टि की उत्पत्ति भगवान शिव द्वारा रचित है एक दिन इसका श्रृंघार होने के बाद भी उन्हीं में समाहित होना है शमशान भगवान शिव का सबसे प्रिय स्थान है जहां से इस देह का समायोजन अंत होना है वह स्थान अपवित्र कैसे हो सकता है इस पावन नगरी हरिद्वार की पावन धरा पर भगवान शिव श्रवण मास में मां पार्वती के साथ खुद विचलन करने इस देव धरा पर आते हैं श्रवण मास में विलव पर्वत पर जब भाबड घास जो बड़ी-बड़ी खड़ी रहती है शिव के आने की पहचान यह है कि वह घास उनके बीछोने के रूप में स्वयं धरती पर बीछ जाती है और श्रावण मास समाप्त होने के पश्चात स्वयं ही खड़ी हो जाती है इस देवस्थली की कनखल नगरी भगवान शिव की ससुराल के रूप में भी जानी जाती है अवसर पर श्री सुरेंद्र श्री उमेश देव राजकुमार महेश खनतवाल सुरेंद्र सहित अनेको लोग उपस्थित थे इस अवसर पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हरिद्वार के अनेकों आश्रमों से आये संत महापुरुषों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया
 

