आजादी, बराबरी, जनवादी अधिकारों के लिए संघर्ष ही जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजली
सम्पादक प्रमोद कुमार
हरिद्वार 13 अप्रैल 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को याद करते हुए आज 13 अप्रैल को ही एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का आयोजन संयुक्त तौर पर किया गया। सेमिनार का विषय हिन्दू फासीवाद और हमारे कार्यभार रखा गया। सेमिनार का आयोजन इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र द्वारा आयोजित किया गया।
 
कार्यक्रम का संचालन करते हुए इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरिद्वार प्रभारी पंकज ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की पृष्ठभूमि और इस हत्याकांड के शहीदों द्वारा आजादी, बराबरी और भाईचारे के लिए किए गए संघर्ष को याद करते हुए श्रद्धांजली दी।
इसके बाद क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किया गया। फिर प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की हरिद्वार प्रभारी नीता ने आज देश में धर्म के नाम पर नफरत भरी राजनीति के साथ ही विद्वेष, साम्प्रदायिक नफरत और दंगों के कहीं भी किसी भी समय होने की संभावना के खतरे को रेखांकित किया। वक्ता ने कहा कि आज दुनिया भर में और हमारे देश में भी हिटलर मुसोलिनी की जैसी फासीवादी राजनीति करने लोगों, पार्टियों और संगठन समाज को बर्बरता की ओर धकेल रहे हैं। एक बार फिर से फासीवादी बर्बरता की ओर समाज को धकेलने का काम आज के विशाल पूंजी के मालिक कर रहे हैं। विशाल पूंजी के मालिक मजदूर मेहनतकश जनता और छोटे मझौले मालिकों को मेहनत और पूंजी को निचोड़ लेना चाहते हैं इसलिए इन्हें धर्म, नस्ल जैसी नफरत भरी राजनीति की जरूरत है ताकि जनता को बांट दिया जाए। इसका जवाब मजदूर मेहनतकश जनता की ही एकजुटता के दम पर समाजवाद समाज स्थापित करके ही दिया जा सकता है।
भेल मजदुर ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष राजकिशोर ने कहा कि रॉलेट एक्ट कानून के विरोध में और आजादी के लिए हिंदू मुस्लिम सिख जनता ने एकजुट होकर संघर्ष किया और जालियांवाला बैग हत्याकांड शहादत हुई।
संयुक्त संघर्षशील मोर्चा हरिद्वार के संयोजक गोविंद ने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि आज देश में अंग्रेज शासकों की बाटों और राज करो की नीति को खुल कर आगे बढ़ाया जा रहा है। हिंदू मुस्लिम , मंदिर मस्जिद के अलावा आज के शासकों के पास कहने को कुछ भी नहीं है। यह अंग्रेजों से भी खतरनाक हिटलर के नाज़ी जर्मनी की याद दिलाती है।
जन अधिकार संगठन के ओमपाल सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज हिंदू धर्म का सहारा लेकर समाज के हर तबके पर हमला किया जा रहा है। मजदूर, किसान, महिलाएं, छात्र सभी के खिलाफ कानून बनाए जा रहे है। जब अपने खिलाफ बने कानूनों के खिलाफ कोई संघर्ष करते तो उनका निर्मम दमन किया जाता है। समाज में दहशत बैठाने का काम किया जा रहा है।
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के भूपाल ने कार्यक्रम का समापन करते हुए कहा कि हमारा सामने आज सबसे बड़ा खतरा आतंकी तानाशाही का है। यह हिटलर के नाज़ी जर्मनी की ही तरह का खतरा है। जब मजदूरों किसानों मेहनकश जनता के आंदोलन खत्म करने के लिए यहूदियों को जर्मन समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बताकर जनता को बांट दिया और फिर उन्मादी भीड़ को पैदा करके लाखों लोगों को गैस चैंबर में झोंक दिया लाखों को यातना कैंप में डाल दिया और फिर दुनिया को दूसरे विश्व युद्ध की ओर धकेल दिया था जिसमें 6 करोड़ लोग मारे गए थे। तब भी इसका जवाब समाजवाद के लिए लड़ रही क्रांतिकारी मजदूर मेहनतकश जनता ने क्रांतिकारी संघर्षों से दिया था। आज भी इसका जवाब समाजवाद के लिए क्रांतिकारी संघर्ष से ही दिया जा सकता है। आज की तात्कालिक जरूरत है कि मजदूर मेहनतकश जनता एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो और संघर्ष करे।
कार्यक्रम में c&s ट्रेड यूनियन, कर्मचारी सत्यम ऑटो संगठन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, देव भूमि श्रमिक संगठन, एवरेडी मजदुर संगठन किर्बी मजदूर कमेटी आदि ट्रेड यूनियन और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बातचीत रखी। सभी वक्ताओं ने इस बात को रेखांकित किया कि आज धर्म के नाम पर हर जगह नफरत फैलाई जा रही है यह ना केवल जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों का अपमान है बल्कि यह मजदूर। मेहनतकश जनता के लिए यह हर तरह से घातक है। एक तरफ यह जनता की नग्न लूट खसोट मचाता है दूसरी तरफ जनता पर आतंक भरी तानाशाही कायम करता है। इसलिए जनता के हर हिस्से को एकजुट होकर इसके खिलाफ और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी।

