19 August 2026

भक्ति भगवान तक पहुंचाने के लिए सेतु का कार्य करती है श्री महंत शीतलानन्द महाराज

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संपादक प्रमोद कुमार

हरिद्वार( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद)कनखल स्थित होली मोहल्ला चोकस्थित श्री सुखदेव चरण दासीय धर्मशाला आश्रम में अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए ज्ञान तथा त्याग की साक्षात मूर्ति परम वंदनीय गुरु भगवानश्री महंत श्री शीतलानन्द महाराज ने कहाभगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति मार्ग को सबसे सरल, सहज और प्रभावशाली मार्ग माना गया है। भक्ति वह अवस्था है जहाँ साधक अपने अहंकार, स्वार्थ और सांसारिक बंधनों को त्याग कर पूर्ण समर्पण के साथ ईश्वर की शरण में चला जाता है। इसमें किसी कठिन साधना, जटिल ज्ञान या कठोर कर्मकांड की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि एक सच्चे हृदय से किया गया प्रेम और विश्वास ही पर्याप्त होता है। जब मन निष्कलुष होकर भगवान का स्मरण करता है, तब साधक और ईश्वर के बीच की दूरी स्वयं ही समाप्त हो जाती है। भक्ति मन को शांति देती है और जीवन को उद्देश्य प्रदान करती है।

 

प्रेमपूर्ण भक्ति के द्वारा ही भगवान अपने भक्त के वशीभूत हो जाते हैं। शास्त्रों और पुराणों में अनेक उदाहरण मिलते हैं जहाँ भगवान ने अपने भक्तों के प्रेम के आगे अपने ऐश्वर्य और शक्ति को भी गौण मान लिया। मीरा का प्रेम, प्रह्लाद की अटूट भक्ति और सुदामा की निश्छल मित्रता यह सिद्ध करती है कि ईश्वर को बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि अंतःकरण की पवित्रता से पाया जा सकता है। भगवान अपने भक्त की भावना देखते हैं, न कि उसके ज्ञान, धन या पद को। जहाँ सच्चा प्रेम होता है, वहाँ भगवान स्वयं प्रकट हो जाते हैं।भक्ति मार्ग मानव को दया, करुणा, विनम्रता और सेवा का भाव सिखाता है। जब मनुष्य ईश्वर से प्रेम करता है, तो वह समस्त सृष्टि में उसी ईश्वर का दर्शन करने लगता है। इससे उसके व्यवहार में मधुरता और जीवन में संतुलन आता है। भक्ति से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन होता है और उसका जीवन सरल व पवित्र बनता है। यही कारण है कि भक्ति को सभी मार्गों में श्रेष्ठ और सुलभ मार्ग कहा गया है।

अतः यह स्पष्ट है कि भगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति ही सच्चा मार्ग है। प्रेम और श्रद्धा से की गई भक्ति के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। जब भक्त निष्काम भाव से भगवान का स्मरण करता है, तब भगवान स्वयं उसे अपनाते हैं। भक्ति मार्ग न केवल मोक्ष की प्राप्ति कराता है, बल्कि इस जीवन को भी आनंद, शांति और सार्थकता से भर देता है। महंत शीतलानंद महाराज ने कहा भक्ति भक्तों के भगवान तक पहुंचाने हेतु सेतु का कार्य करती है

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