पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में ‘जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार’ के पदाधिकारियों का ‘चिंतन शिविर’ आयोजित 

विज्ञापन

प्रमोद कुमार

 

 

पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में ‘जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार’ के पदाधिकारियों का ‘चिंतन शिविर’ आयोजित

• जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और कल्याण को प्रभावी रूप से लागू करने की क्षमता है: मंत्रालय

• सांस्कृतिक विशेषताओं को बचाए रखेंगे, संवर्धन करते रहेंगे: मंत्रालय

• चेतना से पदार्थ बने हैं और पदार्थों से चेतना: श्री दुर्गादास उइके

• जनजातीय भूतल के संवाहक हैं: रंजना चोपड़ा

• सनातन संस्कृति योग, आयुर्वेद, करुणा, एकता संदेश से विश्व में प्रतिष्ठित हो रही है: श्रद्धेय आयुर्वेद शिरोमणि आचार्य बालकृष्ण

• भारत की मूल प्रकृति में भारत बसता है: श्रद्धेय योगऋषि स्वामी रामदेव

30 अप्रैल 26 हरिद्वार, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के पदाधिकारियों का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित कीयअ जा रहा है। इस शिविर का आयोजन मंत्रालय द्वारा जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और सशक्तीकरण के उद्देश्य से किया गया, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों के प्रधान सचिव, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और जनजातीय क्षेत्र के अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने मुख्य अतिथियों का स्वागत शॉल, माला और स्मृति चिह्न भेंट करके किया। शुभारम्भ दीप प्रज्वलन, राष्ट्रीय गीत और डॉ० अर्चना तिवारी व उनकी टीम के समूहगान से हुआ।

भारत सरकार के माननीय मंत्री श्री जुएल ओराम ने कहा कि हमारे देश की जनजातीय समुदायों की संस्कृति, परंपराएँ और जीवनशैली बेहद समृद्ध हैं। इनके समग्र विकास के लिए हमें उनके पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक नीतियों का संतुलित उपयोग करना होगा। भारत सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है ताकि जनजातीय समाज को सशक्त किया जा सके और उन्हें मुख्यधारा में समावेशित किया जा सके। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय देश में विभिन्न जनजातियों के विकास के क्षेत्र में अंतर को पाटने के लिए चौतरफा पहल कर रहा है। यह चिंतन शिविर इस बात का प्रमाण है कि हम सब मिलकर जनजातीय समुदायों के हित के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करना है कि उनका विकास, बिना उनकी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुँचाए हो। उन्होंने अपने मंत्रालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना की सफलता के आधार पर जनजातीय कार्य मंत्रालय ने गांवों में जनजातीय आबादी के समग्र और सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए सांस्कृतिक विशेषताओं को सुरक्षित रखते हुए उनका निरंतर संरक्षण और संवर्धन करते रहेंगे।

माननीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने श्रीराम और शबरी के प्रसंग का उल्लेख कर निष्कपट भक्ति, प्रेम और समानता का संदेश स्पष्ट किया। साथ ही बिरसा मुंडा का उदाहरण देते हुए जनजातीय समाज की ऐतिहासिक भूमिका, अधिकारों और उनके संघर्ष को धर्म, संस्कृति तथा राष्ट्र रक्षा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज का गौरव बढ़ा है और द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रपति पद पर आसीन होना इस सम्मान का प्रतीक है। गुरुकुल परंपरा समझाते हुए चाणक्य व एकलव्य के माध्यम से श्रद्धा, समर्पण और अनुशासन के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने भारतीय संस्कृति को मानव जीवन के विविध मूल्यों का समावेश करने वाली बताया। अपने उद्बोधन में सचिव श्री मनीष ठाकुर ने समावेशी विकास को व्यापक प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि यह सभी वर्गों को सम्मान और समान अवसर प्रदान करता है तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए स्थायी विकास सुनिश्चित करता है। मवेशी विकास व्यापक प्रगति के अंतर्गत सभी को सम्मान अवसर प्रदान करता है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों और भावी विकास को नुकसान पहुँचाएँ बिना दीर्घकालिक बनाए रखता है। सचिव जनजातीय कार्य मंत्रालय रंजना चोपड़ा ने कहा कि जनजातीय समुदाय प्रकृति के संरक्षक हैं जो पर्यावरण संतुलन, संसाधन संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करते हैं तथा मानवता के लिए योगदान देते हैं। उन्होंने जनमन से जनजातीय विकास कार्य हो रहे हैं, उल्लेख प्रधानमंत्री ने मन की बात में किया।

श्रद्धेय आयुर्वेद शिरोमणि आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए आयुर्वेद एक महत्वपूर्ण और प्राचीन उपाय है। यदि हम अपनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को पुनः जीवित करें और आधुनिक विज्ञान के साथ उनका समन्वय करें तो इससे न केवल जनजातीय समुदायों का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सशक्तीकरण होगा बल्कि उनकी जीवनशैली में संतुलन और समृद्धि भी आएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों और पारंपरिक ज्ञान के बीच संतुलन स्थापित करना जनजातीय समाज के कल्याण हेतु एक मजबूत आधार बन सकता है। इस दिशा में सभी को “सर्वभूतेषु” की भावना अपनाते हुए मिलकर कार्य कर रहे हैं। पतंजलि में विभिन्न पिछड़े वर्गों और जनजातीय समुदायों के विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो पूरे भारत में शैक्षिक समानता का उदाहरण है।

इसी क्रम में, श्रद्धेय योगऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि योग और आयुर्वेद जनजातीय समुदायों के शारीरिक, मानसिक और आत्मिक सशक्ति का प्रभावी साधन हैं। समाज को पुरुषार्थी व जागरूक बनाना है। 18 घंटे पुरुषार्थ करना चाहिए। हमारे प्राचीन ज्ञान और पद्धतियों को पुनर्जीवित करना आवश्यक है ताकि जनजातीय लोग अपने जीवन में संतुलन, स्वास्थ्य और समृद्धि का अनुभव कर सकें। स्वामी जी ने यह भी कहा कि समाज में जागरूकता फैलाने और युवाओं को योग और आयुर्वेद के महत्व से परिचित कराने के लिए हमें व्यापक प्रयास करने होंगे। यह न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाएगा बल्कि समाज में सामूहिक शांति एवं समृद्धि भी स्थापित करेगा। रामदेव ने पतंजलि के प्रयासों की विवेचना करते हुए कहा कि पतंजलि ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान, योग और आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हमारा उद्देश्य न केवल देशभर के लोगों को स्वस्थ और सशक्त बनाना है बल्कि हम जनजातीय समुदायों के बीच भी इस ज्ञान को पहुँचाने का काम कर रहे हैं ताकि वे अपने जीवन को अधिक स्वस्थ और समृद्ध बना सकें। उन्होंने आगे कहा कि प्राकृतिक उत्पादों और योग के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में स्थायी विकास संभव है, पतंजलि इस दिशा में लगातार कार्यरत है। हमारा प्रयास है कि हम जनजातीय समाज को उनके पारंपरिक संसाधनों का सही उपयोग करने के लिए प्रेरित करें ताकि उनका स्वास्थ्य और जीवनशैली बेहतर हो सके।

कार्यक्रम में, वक्ताओं द्वारा जनजातीय शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य, संस्कृति संरक्षण एवं डिजिटल सशक्तीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। शिविर का उद्देश्य जनजातीय समुदायों के लिए चल रही योजनाओं की प्रभावशीलता की समीक्षा करना और भविष्य की कार्य योजनाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए रणनीतियाँ तैयार करना था। इस कार्यक्रम में, भारत सरकार के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने जनजातीय समुदायों के लिए बेहतर योजनाओं और कार्यक्रमों की दिशा में सामूहिक प्रयासों को साझा किया। साथ ही, धरातल पर क्रियान्वित योजनाओं से प्राप्त अनुभवों को विचाराधीन रखा और उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए गए। ‘चिंतन शिविर’ के मुख्य विषयों में जनजातीय समुदायों की सशक्त भागीदारी, उनकी परंपराओं का सम्मान करते हुए विकास के नए मार्ग खोजना एवं जनजातीय समुदायों के लिए अनुकूल नीतियों की सिफारिश करना था। मंत्रालय का मानना है कि इस प्रकार के चिंतन संवाद देशभर में जनजातीय समाज के समावेशी और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में भी इस प्रकार के चिंतन संवाद और विचार-विमर्श की परंपरा बनी रहेगी। ज्ञात हो कि जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार, भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है, जो देश की अनुसूचित जनजातियों (Tribal Communities) के विकास और अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्य करता है।

कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद व्यक्त करते हुए गणेश नागराजन ने पतंजलि के जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य और कल्याण योजनाओं की सराहना की। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और अन्य प्रतिनिधियों ने पतंजलि फूड, हर्बल गार्डन और अनुसंधान केंद्र का भ्रमण कर उसके प्रयासों की प्रशंसा की। कार्यक्रम का समापन अतिथियों और प्रतिभागियों के आभार के साथ हुआ।

विज्ञापन

ये भी पढ़ें

Copyright © All rights reserved. | Sakshar Haridwar Powered by www.WizInfotech.com.