श्री महंत रामचरण दास महाराज ज्ञान वैराग्य भक्ति की संजीव मूर्ति थे श्री महंत विष्णु दास महाराज

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प्रमोद कुमार

हरिद्वार खड़खड़ी स्थित प्रसिद्ध श्री जनार्दन आश्रम केश्री महंत रामचरण दास जी महाराज केवल एक संत नहीं, अपितु ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की सजीव प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवनकाल में भक्तों के मध्य ज्ञान की निर्मल सरिता प्रवाहित कर असंख्य जनों को धर्म, सत्य और कल्याण का पथ दिखाया। हरिद्वार के हील बाईपास रोड स्थित श्री जनार्दन आश्रम के प्रातःस्मरणीय श्री महंत रामचरण दास जी महाराज का अक्षय तृतीया के पावन दिवस पर साकेतवास हुआ था। उनकी 17वीं पुण्यस्मृति आज विशाल संत समागम के रूप में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई, जिसमें अनेक संत-महापुरुषों एवं श्रद्धालु भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

इस अवसर पर श्री महंत विष्णु दास जी महाराज ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि सद्गुरु का सानिध्य मनुष्य जीवन का परम सौभाग्य होता है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि आत्मा को जागृत कर जीवन को सार्थक बना देते हैं। पूज्य श्री महंत रामचरण दास जी महाराज ज्ञान रूपी अथाह सागर थे, जिनकी वाणी में अमृत और जीवन में तप, त्याग तथा सेवा का अद्भुत संगम था।महंत सुतीक्षण मुनि महाराज ने कहा कि गुरुदेव का जीवन सादगी, सेवा और साधना का अनुपम उदाहरण था। उनके श्रीचरणों में बैठकर अनेकों ने आत्मज्ञान प्राप्त किया। महंत नारायण दास पटवारी महाराज ने अपने विचार रखते हुए कहा कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि गुरु ही जीव को ईश्वर तक पहुँचाने का सेतु बनते हैं। बाबा हठयोगी महाराज ने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने धर्म की ज्योति को सदैव प्रज्वलित रखा और समाज को अध्यात्म की दिशा दी।महंत हितेश दास महाराज ने कहा कि श्री महंत रामचरण दास जी महाराज का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत है। महंत सूरज दास महाराज ने उन्हें संत समाज का गौरव बताते हुए कहा कि उनका तप, त्याग और प्रेम भाव सदैव स्मरणीय रहेगा। महंत रितेश दास महाराज एवं महंत रामानुज दास महाराज ने भी गुरुदेव के श्रीचरणों में अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गुरु की महिमा शब्दों से परे है, उनका आशीर्वाद ही जीवन का सबसे बड़ा धन है।कार्यक्रम का संचालन महंत रविदेव महाराज ने अत्यंत सुंदर ढंग से किया। समस्त संत समाज एवं भक्तजनों ने पूज्य गुरुदेव को अश्रुपूरित नेत्रों से श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके बताए हुए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। संपूर्ण वातावरण गुरु भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। पूज्य गुरुदेव की दिव्य स्मृतियाँ सदैव भक्तों के हृदय में जीवित रहेंगी और उनका दिखाया हुआ मार्ग अनंत पीढ़ियों का पथप्रदर्शन करता रहेगा। इस अवसर पर महंत श्री राम चरण दास जी महाराज के उत्तराधिकारी महंत हर्ष दास महाराज ने कहा गुरु मिलाते हैं ईश्वर से गुरु ही देते ज्ञान भव सागर की नैया के गुरु ही तारणहार गुरु मनुष्य को जीवन सार्थक करने की युक्ति भी बताते हैं और मुक्ति का मार्ग भी गुरु चरणों से होकर ही जाता है सतगुरु देव इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान का एक विशाल सूर्य थे इस अवसर पर श्री धर्म सिंह आनंद ने बोलते हुए कहा गुरु भक्तों के सच्चे पथदर्शक होते हैं गुरु के मार्गदर्शन के बिना यह जीवन सफल नहीं हो सकता

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