तैयारियाँ हुईं तेज, 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन को दिव्य-भव्य बनाने का संकल्प
हरिद्वार, 10 अक्टूबर।पतंजलि विश्वविद्यालय में आयोजित होने जा रहे 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन (All India Oriental Conference) को ऐतिहासिक, दिव्य एवं भव्य स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से तैयारियाँ तेज हो गई हैं। सम्मेलन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, विभिन्न आयोजन समितियों एवं स्वयंसेवकों द्वारा समन्वित रूप से कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में कल देर सायं पतंजलि विश्वविद्यालय के सभागार में प्रति-कुलपति साध्वी डॉ. देवप्रिया जी के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित कर तैयारियों का जायजा लिया तथा संबंधित विभिन्न समितियों की कार्यप्रगति की विस्तारपूर्वक समीक्षा की। साथ ही उन्होंने आयोजन को सुव्यवस्थित, प्रभावी एवं गरिमामय बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
 
साध्वी डॉ. देवप्रिया जी ने कहा कि अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन भारतीय ज्ञान-परंपरा, प्राचीन शास्त्रों, दर्शन, संस्कृति एवं प्राच्य विद्याओं के संरक्षण, संवर्धन और अकादमिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे प्रतिष्ठित आयोजन की मेजबानी करना पतंजलि विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मेलन देश-विदेश के विद्वानों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा के अध्येताओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहाँ भारतीय मनीषा की समृद्ध विरासत पर गहन चिंतन-मनन एवं विचार-विमर्श का अवसर प्राप्त होगा।
बैठक में सम्मेलन की व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए साध्वी डॉ. देवप्रिया जी ने संबंधित अधिकारियों, समिति प्रभारियों एवं स्वयंसेवकों को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, तत्परता एवं उत्तरदायित्व के साथ करने का निर्देश दिया। उन्होंने तैयारियों के प्रत्येक चरण की नियमित समीक्षा करने, विभिन्न समितियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यों को पूर्ण करने पर विशेष बल दिया।
समीक्षा बैठक में सम्मेलन के सफल संचालन के लिए प्रत्येक समिति की भूमिका एवं जिम्मेदारियों को महत्वपूर्ण बताया गया। आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने, कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने तथा प्रतिभागियों के लिए अनुकूल एवं सुव्यवस्थित वातावरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही, सभी संबंधित सदस्यों को आपसी सहयोग, समर्पण और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।
साध्वी डॉ. देवप्रिया जी ने कहा कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता सामूहिक प्रयास, अनुशासन, समर्पण एवं सूक्ष्म योजना पर निर्भर करती है। अतः सभी अधिकारी, समिति प्रभारी एवं स्वयंसेवक अपने दायित्वों को सेवा-भाव के साथ निभाएँ तथा यह सुनिश्चित करें कि सम्मेलन में पधारने वाले अतिथियों एवं प्रतिभागियों को एक उत्कृष्ट, गरिमामय और ज्ञानवर्धक अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझावों पर भी विचार किया तथा संबंधित टीमों को कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि आगामी 29 से 31 अक्टूबर तक आयोजित 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन के माध्यम से भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, साहित्य, संस्कृति एवं प्राचीन विद्याओं की प्रासंगिकता को व्यापक स्तर पर रेखांकित करने का अवसर मिलेगा। पतंजलि विश्वविद्यालय इस प्रतिष्ठित आयोजन को भारतीय ज्ञान-परंपरा की गरिमा के अनुरूप सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सम्मेलन की तैयारियों को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह एवं सक्रियता का वातावरण है। सभी संबंधित समितियाँ निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूर्ण करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं, ताकि यह आयोजन विद्वत् विमर्श, सांस्कृतिक गौरव और भारतीय प्राच्य विद्या के संवर्धन की दृष्टि से अविस्मरणीय सिद्ध हो सके।



