योग समाज, भाषा, संस्कृति और परंपरांओं को जोड़ता है-महंत साधनानंद

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प्रमोद कुमार हरिद्वार

हरिद्वार, 21 जून। सप्तऋषि क्षेत्र स्थित झालावाड़ गुजरात आश्रम में आश्रम के परमाध्यक्ष योगाचार्य महंत साधनानंद महाराज के संयोजन में 10वां विश्व योग दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर आश्रम में विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में योगाचार्य महंत साधनानंद एवं महंत गोविंददास महाराज ने संतों एवं श्रद्धालुओं को योग और प्राणायाम का अभ्यास कराया। झालावाड़ गुजरात आश्रम के महंत एवं योगाचार्य साधनानंद महाराज ने कहा कि योग भारत की प्राचीन विधा है। भारतीय सनातन परंपरा में योग का विशेष महत्व है। योग और प्राणायाम से भारतीय ऋषि मुनि दीर्घ जीवन व्यतीत करते थे। उन्होंने कहा कि योग समाज, भाषा, संस्कृति और परंपरांओं को जोड़ता है। योग से समस्त विकारों को दूर किया जा सकता है। योग व ध्यान से आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार होता है। योग व प्राणायाम के नियमित अभ्यास से कई असाध्य रोगों को भी ठीक किया जा सकता है। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से 10 वर्ष पूर्व 21 जून को विश्व योग दिवस मनाने की शुरूआत हुई। जिससे योग को एक नई पहचान मिली है। आज पूरा विश्व योग के महत्व को समझ रहा है। महंत गोविंददास महाराज ने कहा कि योग भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली और समस्त विकारों को दूर करने का सबसे उत्तम साधन है। योग और प्राणायाम से लंबी आयु और निरोगी काया प्राप्त की जा सकती है। महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद एवं महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी महाराज ने कहा कि योग चित्त की वृत्तियों का विरोध करता है और रोग भगाने का सबसे सशक्त माध्यम है। सभी को नियमित रूप से योग व प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। स्वामी ऋषिश्वरानंद, स्वामी आशुतोष, आचार्य स्वामी पारसमुनि, महंत शिवम महाराज, महंत सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी रामविशाल दास, योगी नवीन, पूर्व प्रधान सविता, डा.मीरा बहन सहित कई संत महंत व श्रद्धालु मौजूद रहे।

 

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